Matrubhoomi: दूध उत्पादन में भारत को बना दिया दुनिया में नंबर वन, जानिए वर्गीज कुरियन के बारे में

By निधि अविनाश | Apr 18, 2022

वर्गीज कुरियन भारतीय इंजीनियर और उद्यमी जिन्हें भारत की श्वेत क्रांति के वास्तुकार के रूप में माना जाता था, उन्होंने देश को बदल कर रख दिया। आज शायद ही कोई ऐसा मध्यम वर्गीय परिवार होगा, जहां अमूल दूध, घी, मक्खन का इस्तेमाल न किया जाता हो। जिस शख्स ने अमूल ब्रांड को देश के हर घर में पहुंचाने का काम किया वो और कोई नहीं बल्कि वर्गीज कुरियन है। वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को हुआ था। कुरियन को भारत में श्वेत क्रांति का जनक कहा जाता है। वह देश के सबसे बड़े सोशल उद्यमी के नाम से भी जाने जाते है। आपको बता दें कि 26 नवंबर को ही अमूल की स्थापना हुई थी। 1946 में कुरियन ने डेयरी सहकारी, कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (KDCMPUL) की स्थापना की थी जिसे अमूल डेयरी के नाम से जाना जाता है। दूध उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर करने के अलावा वर्गीज कुरियन ने किसानों की स्थिति को सुधारने का काम भी किया। भारत के मिल्कमैन कहे जाने वाले कुरियन ने भारत को दूध उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाया। एक समय ऐसा था जब भारत में दूध की भारी कमी हो गई थी, कुरियन के जरिए भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ। कुरियन ने देश में बिलियन लीटर आइडिया, ऑपरेशन फ्लड और डेयरी फार्मिंग जैसे कई अभियान शुरू किए। कुरियन के बदौतल भारत दूध उत्पादन में अब दुनिया में नंबर एक पर आता है। कुरियन के ही बदौलत देश के एक तिहाई ग्रामीणों की आय का स्रोत दुग्ध उत्पादन है।

वर्गीज कुरियन ने त्रिभुवन भाई पटेल के साथ साझेदारी कर एक सहकारी समिति की नींव रखी थी। इसके अलावा कुरियन दुनिया के पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने भैंस के दूध से पाउडर का निर्माण किया। जानकारी के लिए बता दें कि पहले गाय के दूध से पाउडर को बनाया जाता था। कुरियन के ऑपरेशन फ्लड आइडिया ने डेयरी फार्मिंग को भारत का सबसे बड़ा आत्मनिर्भर उद्योग बनाया। जानकारी के लिए बता दें कि अमूल एक संस्कृत शब्द अमूल्या से लिया गया है। त्रीभूवन दास ने कुरियन के साथ मिलकर गुजरात के खेड़ा जिले में पहले कोऑपरेटिव कि स्थापना की। देश का सर्व प्रथम कोऑपरेटिव संघ केवल दो गाँवों कोऑपरेटिव संस्थानों से शुरु हुआ था। आज जी सी एम एम एफ का स्वामित्व करीब गुजरात के 28 लाख दुध उत्पादक संयुक्त रूप से कर रहे है। श्वेत क्रांति डेयरी बोर्ड का मॉडल अमूल पर आधारित था। एन डी डी बी की पूरी योजना इसी बोर्ड के कार्यचलन पर आधारित थी। अमूल की सफलता का श्रेय डॉ कुरियन को पूरी तरह जाता है।

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वर्गीज कुरियन

केरल के कोझीकोड में एक सीरियाई ईसाई परिवार में जन्में वर्गीज कुरियन ने कोयंबटूर जिले में डायमंड जुबली हायर सेकेंडरी स्कूल, गोबिचेट्टीपलायम में स्कूल में पढ़ाई की, जबकि उनके पिता वहां के सरकारी अस्पताल में काम करते थे।उन्होंने 14 साल की उम्र में लोयोला कॉलेज में प्रवेश लिया, 1943 में इंजीनियरिंग कॉलेज, गिंडी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुेशन की डिग्री प्राप्त की। जब कुरियन 22 साल के थे तब उनके पिता का देहांत हो गया था। अपनी डिग्री पूरी करने के बाद वे 1946 में स्टील टेक्निकल इंस्टिट्यूट, जमशेदपुर में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने 1948 में भारतीय सरकार द्वारा दी गयी छात्रवृत्ति की मदद से मिशिगन राज्य विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। कुरियन जब 13 मई 1949 को भारत लौटे तो उन्हें सरकार द्वारा एक प्रयोगात्मक क्रीमरी, आनंद, गुजरात में नियुक्त किया गया। 

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