By अनन्या मिश्रा | Sep 30, 2026
आज ही के दिन यानी की 30 सितंबर को पूर्व रेलमंत्री माधवराव सिंधिया की एक विमान हादसे में निधन हो गया था। माधवराव सिंधिया यूपी के मैनपुरी में आयोजित एक सभा को संबोधित करने के लिए जा रहे थे। माधवराव सिंधिया के साथ कुछ नेता और पत्रकार भी थे। वह ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखते थे। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर माधवराव सिंधिया के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
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माधवराव सिंधिया ने जनता के बीच जाकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी। साल 1971 में उन्होंने जनसंघ से अपने सियासी सफर की शुरूआत की थी। माधवराव सिंधिया ने अपने पहले चुनाव में ही भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की और देशभर में सुर्खियां बटोरीं।
भले ही उन्होंने अपनी पारी जनसंघ से शुरू की थी, लेकिन बाद में माधवराव ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। वहीं साल 1984 के आम चुनावों में माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर से अटल बिहारी वाजपेयी को शिकस्त दी थी। माधवराव की यह जीत न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए बल्कि पूरे देश की राजनीति के लिए चर्चा का विषय बन गया था। जनसंघ और भाजपा का गढ़ माना जाने वाला ग्वालियर अचानक से सिंधिया के किले में तब्दील हो गया।
1984 से 1998 तक उन्होंने ग्वालियर से लगातार जीत दर्ज की. 1996 में कांग्रेस से अलग होकर भी उन्होंने भारी बहुमत से जीत हासिल की. दूसरी तरफ, उनकी मां राजमाता विजयाराजे सिंधिया गुना से लगातार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतती रहीं।
माधवराव सिंधिया राजनीति के साथ-साथ खेल, कला और संस्कृति से भी गहरा लगाव रखते थे. क्रिकेट, गोल्फ और घुड़सवारी उनके प्रिय शौक थे. वे न केवल खुद उम्दा खिलाड़ी थे, बल्कि बाद में क्रिकेट प्रशासक के रूप में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. कला और फिल्मों में भी उनकी गहरी रुचि थी. लोग अक्सर हैरान होते थे कि इतने शौकों के बावजूद वे राजनीति के लिए दिन में 12 घंटे से भी अधिक समय निकाल लेते थे.
रेल मंत्री रहने के दौरान सबसे पहले माधवराव सिंधिया ने भारत में बुलेट ट्रेन का विचार सामने रखा था। यह सिंधिया की दूरदर्शिता का उदाहरण था। वहीं नरसिंह राव सरकार में जब सिंधिया सिविल एविएशन मंत्री बने थे, तो एक विमान दुर्घटना होने के एक साल के अंदर उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राजनीति में इस तरह की नैतिकता उनको एक अलग पहचान देती थी।
वहीं राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस और देश की जनता की निगाहें देश के अगले पीएम नेताओं पर टिक गई थीं। इनमें माधवराव सिंधिया और राजेश पायलट सबसे आगे माने जा रहे थे। माना जा रहा था कि राजीव गांधी की विरासत को माधवराव सिंधिया आगे ले जा सकते हैं। वहीं राजनीति के समीकरण बदल गए और बाद में नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने थे।
वहीं 30 सितंबर 2001 को माधवराव सिंधिया की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी।