By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 17, 2021
मुंबई। हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के लिए नृत्य एक आध्यात्मिक अनुभव है और उनका कहना है किकला को उनसे अलग करना संभव नहीं है क्योंकि इससे उनके व्यक्तित्व को आकार मिला है। माधुरी पिछली सदी के आखिरी दशक में हिंदी सिनेमा की ‘डांसिंग सुपरस्टार’ थीं और बड़ी संख्या में दर्शक उनकी फिल्मों के दीवाने थे। माधुरी ने पीटीआई-के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘नृत्य ने मुझे अनुशासन, ध्यान और ईमानदारी सिखायी है। जब आप किसी चीज में डूबे होते हैं, तब वह काम नहीं रह जाता है, वह आनंद प्रदान करने वाला हो जाता है। अगर मुझे कोई स्टेप (नृत्य का) 20 हजार बार करना है, तो मैं करूंगी। मुझे कोई अभिमान नहीं है क्योंकि मैं इसके हर पल का आनंद लेती हूं।’’
माधुरी ने तीन साल की उम्र से नृत्य सीखना शुरू कर दिया था। उन्हें अपना वह कार्यक्रम आज भी याद है जब उन्होंने आठ साल की उम्र में अन्य शास्त्रीय संगीतकारों की उपस्थिति में प्रस्तुति दी थी। उन्होंने कहा, ‘‘वह एक रोमांचक क्षण था। मुझे उस समय इसका एहसास नहीं था। मैं बस रोमांचित था कि मुझे फिर से नृत्य करने का मौका मिला। जब अगले दिन अखबार में मेरा नाम प्रकाशित हुआ तो मैं बहुत खुश थी।’’ माधुरी का नृत्य के प्रति लगाव अब भी बरकरार है और वह रियलिटी शो डांस दीवाने के आगामी तीसरे सीज़न में जज की भूमिका में दिखेंगी। कलर्स चैनल के इस शो में उनके साथ कोरियोग्राफर तुषार कालिया और धर्मेश येलांडे भी होंगे। उन्होंने कहा, आप मुझसे नृत्य को अलग नहीं कर सकते, क्योंकि नृत्य प्रकृति में है। आप इसे किसी भी चीज़ से अलग नहीं कर सकते... मुझे हर चीज में नृत्य दिखाई देता है।