मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपना 30 प्रतिशत वेतन किया कोविड सहायता कोष में जमा

By दिनेश शुक्ल | Jul 31, 2020

भोपाल।मध्य प्रदेश के  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने वेतन का 30 प्रतिशत कोविड कोष में जमा करवाया है और उन्होनें अन्य जन प्रतिनिधियों से भी यह आवहन किया है कि वह भी कोरोना के खिलाफ जंग में आर्थिक मदद करें। उन्होंने कहा कि कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं तथा कोरोना मरीजों को नि:शुल्क एवं सर्वोत्तम इलाज की व्यवस्था की गई है। इसके चलते हमने कोरोना पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया है, और हम शीघ्र ही कोरोना को पूर्ण रूप से परास्त कर देंगे। परंतु इस कार्य में राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा व्यय हुआ है तथा आगे भी राशि की जरूरत होगी। हम सबका दायित्व है कि हम शासन के अनावश्यक खर्चों में कटौती करें वहीं व्यक्तिगत रूप से जो भी सहायता कर सकें करें। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ''मैंने निर्णय लिया है कि मैं मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के दिनांक से आगामी 30 सितंबर तक अपने वेतन एवं भत्तों की 30 प्रतिशत राशि कोरोना कार्य के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराऊंगा। अभी तक मेरे द्वारा पहले 3 महीनों की राशि एक लाख 40 हजार रूपये जमा करा दी गई है। मेरे मंत्रिमंडल के साथी भी यह कार्य कर सकते हैं। हमें अब जनता के सक्रिय सहयोग से कोरोना को पूर्ण रूप से परास्त करना है। इसके लिए मध्यप्रदेश में आगामी 1 अगस्त से ''संकल्प की चेन जोड़ो, संक्रमण की चेन तोड़ो'' अभियान चलाया जाएगा।

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मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि विधायकगण अपनी विधायक निधि का उपयोग अपने क्षेत्र में कोरोना नियंत्रण संबंधी कार्यों जैसे मेडिकल स्टाफ के लिए आवश्यक उपकरण, फेस मास्क, थर्मामीटर, पीपीई किट्स, टेस्टिंग किट, वेंटिलेटर, सैनिटाइजर क्रय आदि के लिए करें। इसी के साथ प्रदेश के 22 जिलों में जिला खनिज निधि में आने वाली प्रतिवर्ष लगभग 500 करोड़ रूपये की राशि की एक तिहाई राशि इन जिलों में कोरोना संबंधी कार्यों और गरीबों के लिए रोजगार मूलक कार्यों में खर्च की जा सकेगी। संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से यह राशि स्वीकृत की जाएगी। मंत्रीगणों को जिलों के प्रभार अगले सप्ताह तक आवंटित कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हमें कोरोना संकट को चुनौती में बदलना है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को सबसे पहले मध्य प्रदेश में मूर्त रूप देना है। इसके लिए रोड मैप बनाने की हमारे सभी विभागों ने तेज गति से तैयारी शुरू कर दी है। आगामी 15 अगस्त को आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश का रोडमैप प्रदेश की जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप के प्रमुख चार क्षेत्र स्वास्थ्य एवं शिक्षा, अर्थव्यवस्था एवं रोजगार, भौतिक अधोसंरचना विकास तथा सुशासन होंगे। यह रोडमैप भारत सरकार के नीति आयोग के सहयोग से आगामी 3 वर्षों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसे बनाने के लिए अपर मुख्य सचिव स्तर के चार वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में टीमें निरंतर कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोड मैप में विषय विशेषज्ञों के सुझाव सम्मिलित करने के लिए आगामी 7, 8, 10 एवं 11 अगस्त को प्रातः 11 से 2 एवं अपराह्न 3 से 6 बजे तक वेबीनार आयोजित की जाएंगी। इन वेबीनार में विषय-विशेषज्ञों के साथ ही जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, जिला स्तर के अधिकारी भाग लेंगे। भारत सरकार के नीति आयोग के प्रतिनिधि भी इनमें शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी के प्रयास एवं जनता के सहयोग का ही परिणाम है कि आज हमारी कोरोना रिकवरी रेट 70 प्रतिशत है तथा मृत्यु दर घटकर 2.7 प्रतिशत रह गई है। परन्तु अभी भी प्रदेश के कई स्थानों पर संक्रमण बढ़ रहा है। लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अब हमें बिना लॉकडाउन के पूरी सावधानी एवं सतर्कता से कोरोना को हराना है।

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मुख्यमंत्री चौहान ने मंत्रीगणों से कहा कि हम जनप्रतिनिधि जैसा आचरण करेंगे वैसा ही जनता करेगी। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में स्वयं सभी सुरक्षात्मक उपायों का प्रयोग करें। सभी अनिवार्य रूप से मास्क लगाएं, फिजिकल डिस्टेंसिंग रखें, सैनिटाइजर का प्रयोग करें, कोई सार्वजनिक दौरा अथवा कार्यक्रम न करें, घर पर भी एक बार में 5 व्यक्तियों से ही मिलें। यदि आपने आगे कार्यक्रम निर्धारित किए हों तो उन्हें वर्चुअल के रूप में परिवर्तित कर दें। मुख्यमंत्री चौहान ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए मास्क एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाना अनिवार्य है। कोई भी व्यक्ति चाहे वह मुख्यमंत्री हो, मंत्री हो, जन प्रतिनिधि हो, अधिकारी हो अथवा कोई अन्य, यदि नियम तोड़ता है, तो जुर्माना तो लगेगा ही, प्रकरण भी दर्ज किया जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी मंत्री एवं राज्य मंत्री अलग-अलग स्थानों से ऑनलाइन जुड़े और मुख्यमंत्री चौहान से संवाद भी किया।

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