Prabhasakshi NewsRoom: Maharashtra में Love Jihad या अवैध धर्म परिवर्तन कराने वालों की अब खैर नहीं, सरकार लाई सख्त कानून

By नीरज कुमार दुबे | Mar 14, 2026

महाराष्ट्र में लव जिहाद चलाने वालों की अब खैर नहीं है। हम आपको बता दें कि राज्य विधानसभा में प्रस्तुत महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2026 राज्य में गैरकानूनी रूप से धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस विधेयक के अनुसार, थाना प्रभारी के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत को दर्ज करना अनिवार्य है। मसौदे के अनुसार, यह विधेयक धर्म की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने तथा प्रलोभन, बल, गलतबयानी, अनुचित प्रभाव या धोखाधड़ी के माध्यम से किए गए धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने के लिए है। यदि यह कानून बन जाता है, तो महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जो इस तरह का कानून बना चुके हैं। ऐसे राज्य उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड हैं। विधानसभा में यह विधेयक पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना है।''

महाराष्ट्र सरकार की इस पहल को कई विशेषज्ञ सामाजिक संतुलन और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मान रहे हैं। हम आपको बता दें कि यह विधेयक एक महत्वपूर्ण प्रावधान पेश करता है जिसके अनुसार यदि किसी विवाह या विवाह जैसी स्थिति का आधार अवैध धर्म परिवर्तन हो और उससे कोई बच्चा जन्म ले, तो उस बच्चे का धर्म उसकी माता का वही धर्म माना जाएगा जो विवाह से पहले था। इस प्रकार का प्रावधान अन्य राज्यों के कानूनों में देखने को नहीं मिलता। इससे बच्चों की पहचान और अधिकारों को लेकर होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसे भी पढ़ें: Maharashtra में LPG Crisis की अफवाहों पर लगाम! सरकार ने बनाए कंट्रोल रूम, कालाबाजारी रोकने के लिए जिला कमेटियां तैनात

विधेयक में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि ऐसे विवाह से जन्म लेने वाले बच्चों को माता और पिता दोनों की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा। इसके साथ ही बच्चे को भरण पोषण का अधिकार भी प्राप्त होगा। सामान्य स्थिति में बच्चे की अभिरक्षा माता के पास रहेगी, जब तक कि न्यायालय किसी अन्य व्यवस्था का निर्देश न दे। यह प्रावधान बच्चों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देता है और पारिवारिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक माना जा रहा है।

धर्म परिवर्तन को लेकर विधेयक में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है। जो भी व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे प्रस्तावित धर्म परिवर्तन से कम से कम साठ दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी। इस सूचना में व्यक्ति की आयु, व्यवसाय, पता, वर्तमान धर्म और अपनाए जाने वाले धर्म की जानकारी देनी होगी। इसके बाद जिला प्रशासन यह जांच कर सकेगा कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हो रहा है या किसी दबाव, प्रलोभन या धोखे का परिणाम है।

धर्म परिवर्तन के बाद भी संबंधित व्यक्ति और धर्म परिवर्तन करवाने वाले व्यक्ति या संस्था को साठ दिन के भीतर प्रशासन को इसकी जानकारी देनी होगी। इस प्रक्रिया से प्रशासनिक अभिलेख तैयार होंगे और धार्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। यदि निर्धारित समय में यह सूचना नहीं दी जाती, तो उस परिवर्तन को अमान्य माना जा सकता है।

विधेयक में अवैध धर्म परिवर्तन की परिभाषा को भी विस्तार दिया गया है। यदि किसी व्यक्ति को प्रलोभन, धोखा, दबाव, गलत प्रस्तुति या अनुचित प्रभाव के माध्यम से धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जाता है, तो उसे अवैध माना जाएगा। इसमें आर्थिक लाभ, उपहार, रोजगार का वादा, बेहतर जीवन शैली का लालच, मुफ्त शिक्षा या विवाह का प्रलोभन भी शामिल किया गया है।

कानून के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को सामाजिक बहिष्कार की धमकी, दैवी अप्रसन्नता का भय, संपत्ति या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी या मानसिक अथवा शारीरिक दबाव देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो इसे भी अवैध माना जाएगा। इस प्रकार के प्रावधान कमजोर वर्गों, महिलाओं और अल्प आयु के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रखे गए हैं।

विधेयक में महिलाओं, अल्प आयु के व्यक्तियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित लोगों को संवेदनशील वर्ग के रूप में चिन्हित किया गया है। यदि इन वर्गों का धर्म परिवर्तन उनके कमजोर सामाजिक स्थान का लाभ उठाकर कराया जाता है, तो उसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।

दंड के प्रावधान भी इस विधेयक को प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अवैध धर्म परिवर्तन कराने पर सात वर्ष तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि मामला महिला, अल्प आयु के व्यक्ति या अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति से जुड़ा हो, तो जुर्माना पांच लाख रुपये तक हो सकता है। बार-बार अपराध करने वालों के लिए दस वर्ष तक की कैद और सात लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा, यदि किसी संस्था या संगठन पर अवैध धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने का आरोप सिद्ध होता है, तो सरकार उसके पंजीकरण को रद्द कर सकती है और दी जा रही आर्थिक सहायता भी वापस ले सकती है। इससे ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

देखा जाये तो महाराष्ट्र सरकार का यह प्रस्ताव उस व्यापक चिंता की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें कई स्थानों पर अवैध और सामूहिक धर्म परिवर्तन की घटनाओं की चर्चा होती रही है। इसी कारण सरकार ने एक विशेष समिति का गठन किया था जिसने अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद यह विधेयक तैयार करने की सिफारिश की। हालांकि कुछ सामाजिक संगठनों ने इस विधेयक को लेकर चिंता व्यक्त की है और इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़ा है, लेकिन सरकार का तर्क है कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता देता है, परंतु यह स्वतंत्रता पूर्ण रूप से निरंकुश नहीं है। सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और सामाजिक संतुलन को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

समग्र रूप से देखा जाए तो धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 महाराष्ट्र में धार्मिक परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रियाओं को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने का प्रयास है। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, संवेदनशील वर्गों की रक्षा और प्रशासनिक निगरानी जैसे प्रावधान इसे एक संतुलित और दूरदर्शी पहल बनाते हैं। महाराष्ट्र सरकार की यह पहल देश में सामाजिक समरसता और विधि आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा सकती है।

प्रमुख खबरें

Demonetisation जैसी कतारें, LPG संकट पर Sanjay Raut ने पूछा- PM Modi कहां हैं?

Raftaar: Rajkummar Rao और Keerthy Suresh की जोड़ी पर्दे पर मचाएगी धमाल, पत्रलेखा के प्रोडक्शन में बनी इस थ्रिलर का हुआ एलान

BJP नेता K. Annamalai का दावा- 70% Oil Supply सुरक्षित, DMK सिर्फ डर का माहौल बना रही

West Asia में तनाव के बीच बड़ी राहत, ईरान ने निभाई दोस्ती, Hormuz से भारतीय जहाजों को मिला Safe Passage