Jabalpur Boat Tragedy | लाइफ जैकेट नहीं पहनी, IMD की चेतावनी को किया गया दरकिनार, सुरक्षा नियमों की धज्जियाँ उड़ाने से गई 9 जान

By रेनू तिवारी | May 01, 2026

जबलपुर के बरगी बांध में गुरुवार को हुआ क्रूज़ हादसा अब केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासन और ऑपरेटरों की 'आपराधिक लापरवाही' का मामला बनता जा रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हादसे से 24 घंटे पहले ही तेज हवाओं की चेतावनी जारी की थी, जिसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। शुक्रवार को बचाव दल ने जलाशय से तीन और शव बरामद किए, जिसके बाद इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है।बचाव दल ने बरगी बांध के जलाशय से तीन और शव निकाले।

बचे हुए लोगों ने घोर लापरवाही का खुलासा किया, कोई लाइफ़ जैकेट नहीं दी गई

दिल्ली की एक पर्यटक संगीता कोरी ने इस दुखद हादसे के बारे में बताते हुए कहा कि अचानक चली तेज़ हवाओं के कारण नाव में पानी घुसने लगा, जिससे अफ़रा-तफ़री मच गई। लोग लाइफ़ जैकेट पकड़ने के लिए भागने लगे, जो ऑपरेटरों ने तभी दीं जब नाव में पानी घुसना शुरू हो गया था।

उन्होंने कहा, किसी को भी पहले से लाइफ़ जैकेट नहीं पहनाई गई थी। जब पानी अंदर आने लगा, तो उन्होंने जल्दबाज़ी में उन्हें बाँटना शुरू कर दिया, जिससे अफ़रा-तफ़री मच गई और लोग उन्हें छीनने लगे। फिर क्रूज़ पलट गया। इसमें बहुत ज़्यादा लापरवाही बरती गई थी।

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उन्होंने आगे कहा, "नाव का पायलट (चालक) बिल्कुल भी किसी की बात नहीं सुन रहा था। गाँव के लोग चिल्ला रहे थे और उसे इशारा कर रहे थे कि वह क्रूज़ को किसी सुरक्षित जगह पर ले जाए, लेकिन वह उसी रास्ते पर आगे बढ़ता रहा, जिसके कारण नाव अचानक पलट गई। मेरे भाई ने स्टोररूम का दरवाज़ा तोड़कर लोगों की तरफ़ तेज़ी से लाइफ़ जैकेट फेंक दीं।"

मौसम की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया

मौसम विभाग ने एक दिन पहले ही एक एडवाइज़री जारी की थी, जिसमें जबलपुर में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएँ चलने की चेतावनी दी गई थी। इस चेतावनी के बावजूद, गुरुवार को शाम लगभग 4:30 बजे क्रूज़ को पानी में उतरने की अनुमति दे दी गई; इस घटना के बाद अब इस फ़ैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस सुविधा का संचालन करने वाला पर्यटन विभाग अब जाँच के दायरे में है। बरगी बांध पर क्रूज़ सेवा 2006 से जल-आधारित पर्यटन गतिविधियों के हिस्से के रूप में संचालित हो रही है। इस जगह पर 2 क्रूज़, 1 हाउस बोट और 1 मिनी क्रूज़ चलते हैं। हर क्रूज़ में 60 लोगों तक की क्षमता होती है। रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे के समय उस बदकिस्मत जहाज़ पर 2 क्रू सदस्य और 29 से 34 पर्यटक सवार थे।

बचाव अभियान जारी, किनारे पर शोक में डूबे परिवार

अब तक करीब 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 9 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। क्रूज़ करीब 20 मीटर पानी के नीचे डूबा हुआ है। यह हादसा किनारे से बांध के अंदर करीब 300 मीटर की दूरी पर हुआ। जबलपुर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक, SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) और दूसरी बचाव टीमों के साथ मौके पर मौजूद हैं, जबकि अधिकारी जब पानी से शवों को बाहर निकालते हैं तो शोक में डूबे परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल हो जाता है।

एक और बचे हुए व्यक्ति ने बताया "मेरा बेटा और पत्नी लापता हैं। जब क्रूज़ बोट एक लहर से टकराई और उसका शीशा टूट गया, तो मुझे चोट लग गई। स्टाफ़ ने हमें लाइफ़ जैकेट नहीं दीं; हमने खुद उनका इंतज़ाम किया और उन्हें आपस में बांटा। मौसम खराब होने की साफ़ चेतावनियों के बावजूद, अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्रूज़ चलाने की इजाज़त क्यों दी गई, और क्या सुरक्षा के ज़रूरी नियमों का ठीक से पालन किया गया था।

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