By अभिनय आकाश | Oct 07, 2026
महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय को बताया है कि महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम इसलिए लागू किया गया है क्योंकि राज्य शहरी माओवादी गतिविधियों का केंद्र बन गया है, जहां 64 सक्रिय फ्रंटल संगठन कार्यरत हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। मंगलवार को दायर हलफनामे में सरकार ने कहा कि यह कानून गैरकानूनी, विध्वंसक और चरमपंथी गतिविधियों को रोकने और उनसे निपटने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करने के लिए लाया गया है। यह हलफनामा महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं के जवाब में दायर किया गया था। ये याचिकाएं कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दायर की गई हैं, जिन्होंने तर्क दिया है कि यह कानून कार्यपालिका को अस्पष्ट और अति व्यापक परिभाषाओं के आधार पर संगठनों पर प्रतिबंध लगाने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की व्यापक शक्तियां देता है।
मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ताओं को सरकार के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। राज्य विधानसभा द्वारा पिछले जुलाई में पारित और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिसंबर में स्वीकृत इस अधिनियम का उद्देश्य वामपंथी उग्रवादी संगठनों या इसी तरह के निकायों की कुछ गैरकानूनी गतिविधियों की प्रभावी रोकथाम करना है। कानून में चार अपराधों का उल्लेख है जिनके लिए किसी व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है: गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना; सदस्य न होते हुए भी ऐसे संगठन के लिए धन जुटाना; इसके प्रबंधन में सहायता करना; या गैरकानूनी गतिविधि करना। यह राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध संगठन को "गैरकानूनी संगठन" घोषित करने का अधिकार भी देता है।