Kolhapur Clashes Updates: सवाल तो सही पूछा है फडणवीस ने, आखिर कहाँ से आ गयी हैं Aurangzeb की इतनी औलादें?

By नीरज कुमार दुबे | Jun 07, 2023

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में कुछ लोगों द्वारा टीपू सुल्तान की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक ऑडियो संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और मुगल बादशाह औरंगजेब का पोस्टर लेकर घूमा गया। जब स्थानीय लोगों की भीड़ ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया तो पुलिस ने उनको तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया जिससे इलाके में तनाव पैदा हो गया है। बताया जा रहा है कि दक्षिणपंथी संगठन के कार्यकर्ताओें ने मैसुरु के 18वीं सदी के शासक की तस्वीर के साथ कथित तौर पर अपमानजनक संवाद सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मंगलवार को प्रदर्शन किया था जिन्हें पुलिस ने समझा-बुझाकर शांत करा दिया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बताया था कि इस मामले में कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं ने हालांकि एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर बुधवार को प्रदर्शन किया।

कोल्हापुर के पुलिस अधीक्षक महेंद्र पंडित ने बताया, ‘‘कुछ संगठनों ने कोल्हापुर बंद का आह्वान किया था और उनके कार्यकर्ता आज शिवाजी चौक पर जमा हुए थे। प्रदर्शन के बाद भीड़ लौट रही थी, तभी कुछ उपद्रवियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी जिसकी वजह से पुलिस को उनके खिलाफ बल प्रयोग करना पड़ा।’’ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उन्होंने शांति व्यवस्था कायम रखने और प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटरनेट सेवा बंद करने के लिए एक प्रस्ताव प्रशासन के पास भेजा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) के कर्मियों को शहर में तैनात किया गया है जबकि पुलिस ने सतारा से और पुलिस बल की मांग की है। अधिकारी ने कहा कि 19 जून तक निषेधात्मक आदेश लागू कर दिए गए हैं और पांच या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि घरों पर पथराव और वाहनों के क्षतिग्रस्त होने के बाद ही बल और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उपद्रवियों का पता लगाना और उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया है। इस बीच, कोल्हापुर के जिलाधिकारी ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। वहीं, उन्होंने जनता से अनुरोध किया कि वे अधिकारियों के साथ सहयोग करें और बातचीत के माध्यम से मसलों को हल करें। वहीं, कोल्हापुर के प्रभारी मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जिन्होंने टीपू सुल्तान की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक ऑडियो संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। 

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बयान

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी शांति बनाए रखने की अपील करते हुए लोगों से कानून हाथ में नहीं लेने का अनुरोध किया है। शिंदे ने कहा, ‘‘कानून हाथ में लेने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मैं स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूं और आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सामान्य लोगों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को शांति बनाए रखने में प्रशासन की मदद करनी चाहिए।

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान

वहीं, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि कुछ नेताओं की ओर से राज्य में दंगे जैसे हालात संबंधी बयान तथा किसी खास समुदाय के एक वर्ग द्वारा औरंगजेब तथा टीपू सुल्तान को महिमामंडित किए जाने की घटना महज इत्तेफाक नहीं हो सकती। उप मुख्यमंत्री ने नवी मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मुगल शासक औरंगजेब को महिमामंडित करने के कृत्य को महाराष्ट्र में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच करके यह पता लगाया जएगा कि युवकों के एक वर्ग को कौन उकसा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य के कुछ इलाकों में दंगे जैसे हालात पैदा हो रहे है क्योंकि एक खास समुदाय के लोग औरंगजेब को महिमामंडित कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा, ''कुछ नेता कह रहे थे कि राज्य में दंगे जैसे हालात बन सकते हैं। इन नेताओं की टिप्पणियों की प्रतिक्रिया में खास समुदाय के युवाओं ने औरंगजेब की तस्वीरें लहराईं। उन्होंने औरंगजेब और टीपू सुल्तान को महिमामंडित किया।ये महज इत्तेफाक नहीं हो सकता।’’ फडणवीस ने कहा, ''क्यों अचानक महाराष्ट्र के कई जिलों में ये तस्वीरें दिखाई गईं? ये आसानी से या अपने आप नहीं होता। और महज इत्तेफाक भी नहीं हो सकता,हमें इस मामले की तह तक जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि उन्हें अचरज हुआ कि कोल्हापुर में विपक्ष के एक मुख्य नेता ने कहा कि उन्हें मालूम हैं कि दंगे होंगे। उप मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उनके बयान के बाद वहां के कुछ युवाओं ने औरंगजेब और टीपू सुल्तान का महिमामंडन किया, और उसके बाद प्रतिक्रिया आई। क्या बयान और घटनाओं के बीच कोई संबंध है? हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि कौन औरंगजेब का महिमामंडन कर रहा है और कौन लोगों को ऐसा करने के लिए उकसा रहा है। जांच पूरी होने के बाद मैं उन चीजों का खुलासा करूंगा।’’

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को दावा किया था, “शासक राज्य में कानून-व्यवस्था स्थापित करने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर सत्ता पक्ष और उनके लोग इसे लेकर सड़कों पर उतर आते हैं तथा दो धर्मों के बीच दरार पैदा करते हैं तो यह शुभ संकेत नहीं है।’’

फडणवीस ने किसी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘मैं आसानी से देख पा रह हूं कि ये सारे नेता एक जैसी भाषा बोल रहे है। एक खास समुदाय के लोग उनकी मदद कर रहे हैं और औरंगजेब को महिमामंडित कर रहे हैं। राज्य के कुछ इलाकों में दंगे जैसे हालात पैदा हो रहे है क्योंकि एक खास समुदाय के लोग औरंगजेब को महिमामंडित कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ''महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों का पालन करता है। हम सब ने कुछ नेताओं को औरंगजेब को देशभक्त दिखाने का प्रयास करते देखा है। हमें यह जांच करनी होगी कि कैसे कुछ नेता एक ही भाषा में बात करते हैं और कैसे उन्हें तत्काल प्रतिक्रिया मिलती है।’’ बाद में उन्होंने नागपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की कोशिश करने वालों का पता लगा लेगी।

शरद पवार का बयान

दूसरी ओर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में कुछ छोटे मुद्दों को “धार्मिक रंग” दिया जा रहा है और सत्ताधारी दल ऐसी चीजों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो चिंता का विषय है। कानून-व्यवस्था की स्थिति और हिंसा की कुछ घटनाओं के बारे में पूछे जाने पर पवार ने दावा किया कि राज्य में कुछ छोटे मुद्दों को “धार्मिक रंग” दिया जा रहा है। उन्होंने औरंगाबाद में संवाददाताओं से कहा, “शासक राज्य में कानून और व्यवस्था स्थापित करने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर सत्ता पक्ष और उनके लोग इसे लेकर सड़कों पर उतर आते हैं और दो धर्मों के बीच दरार पैदा करते हैं तो यह शुभ संकेत नहीं है।”

पवार ने आरोप लगाया, “हाल ही में हमने अहमदनगर के बारे में सुना। आज मैंने कोल्हापुर की खबर देखी। लोग सड़कों पर निकल आए और फोन पर संदेश भेजने की एक छोटी सी घटना को धार्मिक रंग देना अच्छा संकेत नहीं है। सत्ताधारी दल ऐसी बातों को बढ़ावा दे रहे हैं।” राकांपा प्रमुख ने कहा कि मोबाइल फोन से भेजे गए किसी भी संदेश को धार्मिक रंग देना गलत है। उन्होंने कहा, “कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन अगर सरकार ही लोगों को भड़काती है और समाज में फूट पैदा करती है तो यह अच्छा संकेत नहीं है।” पवार ने कहा कि राज्य में पिछले कुछ दिनों में दंगे जैसी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने पूछा, “लेकिन अच्छी बात यह है कि तनाव संबंधित क्षेत्रों तक ही सीमित है। लेकिन ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, अगर किसी ने औरंगाबाद में औरंगजेब की तस्वीर दिखाई है, तो पुणे में विरोध करने का क्या कारण है?” 

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