By अभिनय आकाश | Jun 29, 2026
महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच एक नई राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। दोनों नेताओं के बीच यह टकराव शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल होने के कुछ दिनों बाद हुआ है। हिंगोली में एक रैली को संबोधित करते हुए ठाकरे ने दावा किया कि बीजेपी का चर्चित 'ऑपरेशन टाइगर' असल में 'ऑपरेशन देवेंद्र' था। उन्होंने इसे विपक्ष के खिलाफ नहीं, बल्कि फडणवीस को भविष्य में प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर उभरने से रोकने के लिए बनाई गई एक चाल बताया। बिना चुनाव हुए ही सांसद दूसरी पार्टी में चले गए। उन्होंने इसके बजाय BJP क्यों जॉइन नहीं की? मुझे शक है कि यह असल में 'ऑपरेशन देवेंद्र' है। ठाकरे ने कहा कि अमित शाह ने शायद यह सब इसलिए किया ताकि फडणवीस एक खास स्तर पर ही बने रहें और प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल न हो सकें। अगर कल ज़रूरत पड़ी, तो ये बागी नेता प्रधानमंत्री पद के लिए अमित शाह को वोट देंगे।
पालघर में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि उनका पूरा ध्यान विकास पर है। मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं एक इंसान हूं। मेरे पंख नहीं हैं, तो उन्हें कौन काट सकता है? मुझे महाराष्ट्र के 14 करोड़ लोगों और अपने वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त है, इसलिए चिंता करने की कोई बात नहीं है। उनकी यह प्रतिक्रिया तब आई जब बीजेपी ने पार्टी छोड़ने वालों और ठाकरे के साथ उनके संबंधों को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करने की कोशिश की।
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब कुछ दिन पहले ही फडणवीस और ठाकरे ने मुंबई से नागपुर के लिए एक ही कमर्शियल फ़्लाइट में अचानक यात्रा की थी, जिससे शिवसेना में बगावत के बीच ज़बरदस्त राजनीतिक अटकलें शुरू हो गई थीं। इस फ़्लाइट में आदित्य ठाकरे और शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत भी सवार थे। इस मुलाक़ात को ज़्यादा तूल न देते हुए फडणवीस ने मज़ाक में कहा कि असली हेडलाइन साथ यात्रा करना नहीं थी। उन्होंने TV9 मराठी से कहा कि हम तीनों - उद्धव ठाकरे, संजय राउत और मैं - फ़्लाइट में साथ थे, यही सबसे बड़ी ख़बर है। बीजेपी ने भी ज़ोर देकर कहा कि इस मुलाक़ात का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था; इसे महज़ एक इत्तेफ़ाक बताया और कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी होने का मतलब यह नहीं है कि वे निजी दुश्मन भी हों।
यह घटनाक्रम ठाकरे के लिए राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील समय पर हुआ है। उनके गुट को पिछले हफ़्ते बड़ा झटका लगा था, जब उनके नौ में से छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए, जिससे सत्ताधारी महायुति गठबंधन और मज़बूत हो गया। इन सांसदों के पाला बदलने से शिवसेना (UBT) के भविष्य पर फिर से सवाल उठने लगे हैं और ठाकरे तथा शिंदे गुटों के बीच राजनीतिक टकराव और तेज़ हो गया है।