By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 21, 2026
महाराष्ट्र में बारिश की कमी के कारण गन्ने की पैदावार घटने और चीनी की चीनी प्राप्ति दर कम रहने से आगामी पेराई सत्र में चीनी उत्पादन करीब 20 प्रतिशत घटकर 80 लाख टन रह सकता है। वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (डब्ल्यूआईएसएमए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। डब्ल्यूआईएसएमए के चेयमैन भैरवनाथ थोम्ब्रे ने सोमवार को कहा कि इस साल महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी हुई है, जिसका असर गन्ने सहित कई फसलों की पैदावार पर पड़ा है।
इसलिए, गन्ने की जल्द पेराई जरूरी है। इसके अलावा, चीनी मिलें चलाने के लिए पानी की कमी है और सूखे जैसे हालात के कारण अगले साल जनवरी-फरवरी में इसे संभालना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने इस साल जलाशयों को पीने के पानी के लिए आरक्षित रखा है।’’ उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतें अभी अच्छी हैं और दिवाली के त्योहार के दौरान भी स्थिर रह सकती हैं।
थोम्ब्रे ने कहा, ‘‘चीनी प्राप्ति दर (कुल वजन से निकाली गई चीनी का प्रतिशत) से होने वाले नुकसान की भरपाई अच्छी कीमतों से की जा सकती है। सरकार ने कोटा जारी करने के बजाय सीधे बाजार में चीनी भेजने की अनुमति भी दी है।’’ उन्होंने इस साल 15 अक्टूबर से चीनी पेराई सत्र जल्दी शुरू करने के फैसले का भी समर्थन किया और कहा कि इससे किसानों और चीनी मिलों को फायदा होगा। थोम्ब्रे ने कहा कि मराठवाड़ा, विदर्भ, सोलापुर और अहिल्यानगर जिलों में पिछले 45 दिनों से बारिश न होने के कारण हालात गंभीर हो गए हैं, जिससे गन्ना सूख रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर गन्ने को जल्द से जल्द पेराई के लिए भेजा जाए, तो किसानों को कुछ लाभ मिल सकता है, वरना फसल खेतों में ही सूख सकती है।