'थोड़ी शर्म और हिम्मत दिखाओ...', यूसुफ पठान के बागी गुट में शामिल होने पर Mahua Moitra का तीखा हमला

By रेनू तिवारी | Jun 09, 2026

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे अभूतपूर्व राजनीतिक घमासान के बीच पार्टी की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने अपनी ही पार्टी के सांसद और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर यूसुफ पठान पर सीधा और बेहद तीखा हमला बोला है। महुआ मोइत्रा का यह गुस्सा तब फूटा, जब टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों ने बगावत करते हुए केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन को समर्थन देने का चौंकाने वाला फैसला किया। कृष्णानगर से लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान की कड़ी आलोचना की।

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मोइत्रा अब तक पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी रही हैं, जबकि पार्टी 1998 में अपने गठन के बाद से सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है। असल में, उन्होंने हाल ही में उन बागी विधायकों पर कड़ा प्रहार किया था जिन्होंने पार्टी के विधायी विंग पर नियंत्रण कर लिया था। उन्होंने उन्हें "पूरी तरह बेकार" नेता बताया जो केवल ममता बनर्जी के करिश्मे के दम पर टिके हुए थे।

यूसुफ पठान-ममता बनर्जी विवाद

पठान हाल ही में एक राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए थे। एक बंगाली दैनिक अखबार ने खबर दी थी कि TMC ने पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की मदद से पूर्व क्रिकेटर को बहरामपुर सांसद के पद से इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की थी, ताकि बनर्जी उस सीट से उपचुनाव लड़ सकें। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि पठान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, TMC बहरामपुर को बनर्जी के लिए एक सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र मानती थी, क्योंकि वहां मुस्लिम आबादी (जो पार्टी का मुख्य समर्थक आधार है) मतदाताओं का अनुमानित 50-52 प्रतिशत हिस्सा है।

हालांकि, गांगुली ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया और अखबार पर "सच्चाई की पूरी तरह अनदेखी" करने का आरोप लगाया।

पठान ने 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया था और 1990 के दशक के अंत में पार्टी के गठन के बाद से बहरामपुर सीट जीतने वाले पहले TMC उम्मीदवार बने थे। TMC के लोकसभा सांसदों में फूट

मोइत्रा का यह बयान तब आया, जब चीफ़ व्हिप काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने की घोषणा की, जिससे TMC की संसदीय इकाई में फूट पड़ गई।

घोष दस्तीदार ने कहा कि अलग होने का फ़ैसला साथी सांसदों से बातचीत के बाद लिया गया। उन्होंने कहा, "हमने जनता के फ़ैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना ​​है कि हमारी भविष्य की राजनीतिक दिशा NDA के साथ होनी चाहिए।"

बागी गुट के सूत्रों ने बताया कि सांसदों की तुरंत TMC छोड़ने या औपचारिक रूप से BJP में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय, वे NDA को समर्थन देते हुए एक अलग संसदीय समूह के तौर पर काम करना चाहते हैं। इस कदम को बागी सांसदों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

 

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