By अंकित सिंह | Jul 11, 2026
मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के ड्राफ्ट की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में नौ सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इससे राज्य में BJP का चुनावी वादा कानून बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक अगस्त में विधानसभा सत्र में यह बिल पेश किए जाने की संभावना है।
राज्य के न्यायिक विभाग ने इस संबंध में 10 जुलाई को एक अधिसूचना जारी की। न्यायिक विभाग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने से पहले, राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली में समिति के अध्यक्ष जस्टिस देसाई के साथ बैठक की। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पहले ही 'यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड, पश्चिम बंगाल, 2026' नाम का एक ड्राफ़्ट बिल तैयार कर लिया है। इसका मकसद राज्य के सभी नागरिकों के लिए—चाहे उनका धर्म, आस्था या समुदाय कुछ भी हो—शादी, तलाक़, बिना वसीयत के उत्तराधिकार और वसीयत के ज़रिए उत्तराधिकार जैसे निजी नागरिक मामलों के अहम पहलुओं पर एक व्यापक कानूनी ढांचा बनाना है।
2 जुलाई को सुवेंदु अधिकारी कैबिनेट ने UCC बिल के ड्राफ्ट की समीक्षा के लिए जस्टिस देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने को मंज़ूरी दी। जस्टिस देसाई ने BJP-शासित उत्तराखंड, गुजरात और छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह की UCC कमेटियों की अध्यक्षता की है। इस कमेटी के पास ड्राफ्ट कानून की जांच करने और अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए चार हफ़्ते का समय होगा, जिसके बाद इसे विधानसभा के सामने पेश किया जाएगा।
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