By Ankit Jaiswal | Jun 30, 2026
टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में समूह के वरिष्ठ उद्योगपति और वोल्टास के चेयरमैन नोएल टाटा ने मंगलवार को अपने पद से हटने की घोषणा कर दी। कंपनी की 72वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के रूप में यह उनकी अंतिम वार्षिक आम बैठक है। इससे पहले वह खुदरा कारोबार से जुड़ी कंपनी ट्रेंट के चेयरमैन पद छोड़ने का भी ऐलान कर चुके हैं।
बता दें कि नोएल टाटा वर्ष 2003 में वोल्टास के निदेशक मंडल से जुड़े थे। इसके बाद सितंबर 2017 में उन्होंने इशात हुसैन के स्थान पर कंपनी के गैर-कार्यकारी चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली थी। लगभग आठ वर्षों तक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कंपनी की रणनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपने संबोधन में उन्होंने निवेशकों, कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों का विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वर्षों तक मिले विश्वास, सहयोग और समर्थन के कारण ही कंपनी आज मजबूत स्थिति में खड़ी है। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वोल्टास ने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत भी सकारात्मक प्रदर्शन के साथ की है।
गौरतलब है कि नोएल टाटा ने कंपनी के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए बताया कि वोल्टास के कमरों को ठंडा करने वाले यंत्रों के कारोबार ने इस वर्ष केवल 81 दिनों में 10 लाख इकाइयों की बिक्री का रिकॉर्ड बनाया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि बाजार में कंपनी की मजबूत स्थिति और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाती है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय कर्मचारियों और संयुक्त उद्यम सहयोगियों को भी दिया।
मौजूद जानकारी के अनुसार, नोएल टाटा इस वर्ष नवंबर में 70 वर्ष के हो जाएंगे। कंपनी कानून 2013 के तहत 70 वर्ष की आयु के बाद कुछ प्रमुख कार्यकारी पदों पर बने रहने के लिए विशेष स्वीकृतियों की आवश्यकता होती है। हालांकि वह गैर-कार्यकारी भूमिकाओं में लंबे समय से समूह की कई कंपनियों का मार्गदर्शन करते रहे हैं।
बता दें कि नोएल टाटा वर्तमान में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन भी हैं, जो टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है। इसके अलावा वह टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, टाटा इंटरनेशनल, ट्रेंट हाइपरमार्केट और टाटा इंटरनेशनल वेस्ट एशिया डीएमसीसी जैसी कंपनियों के गैर-कार्यकारी चेयरमैन हैं। वहीं टाटा स्टील और टाइटन कंपनी में वह उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
करीब चार दशक तक टाटा समूह के साथ जुड़े रहने के बाद नोएल टाटा का यह फैसला समूह में नेतृत्व परिवर्तन के महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है। उद्योग जगत की नजर अब इस बात पर रहेगी कि वोल्टास और समूह की अन्य कंपनियों में आगे नेतृत्व की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है और यह बदलाव कंपनी की भविष्य की विकास रणनीति को किस दिशा में ले जाता है।