By रेनू तिवारी | Jan 12, 2026
महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने 'मुख्यमंत्री माझी लाडली बहना योजना' के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। सरकार मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर यानी 14 जनवरी को पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3,000 रुपये की राशि जमा करने की तैयारी कर रही है। यह राशि दिसंबर और जनवरी की दो लंबित किस्तों को मिलाकर दी जा रही है। लेकिन, नगर निगम चुनावों (Municipal Corporation Elections) से ठीक एक दिन पहले होने वाले इस भुगतान ने राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
सरकारी योजना के अनुसार, दिसंबर और जनवरी महीने की 1500-1500 रुपये की किस्तों को एक साथ ट्रांसफर किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि वह त्यौहार के अवसर पर महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। हालांकि, टाइमिंग को लेकर विपक्ष हमलावर है।
कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग को एक औपचारिक शिकायत भेजी है, जिसमें तर्क दिया गया है कि मतदान की पूर्व संध्या पर फंड जारी करना चुनाव नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। पार्टी ने कहा कि 15 जनवरी को मतदान होगा और मतदान से ठीक पहले महिला लाभार्थियों के खातों में पैसे जमा करने से वोट प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस के अनुसार, लगभग एक करोड़ महिलाओं को यह किस्त मिलने वाली है। पार्टी ने दावा किया कि इस तरह के कदम से सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवारों को फायदा हो सकता है और इसे "सरकारी रिश्वत का एक रूप" बताया।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह लाडली बहना योजना के खिलाफ नहीं है, लेकिन जोर दिया कि किस्तें मतदान पूरा होने के बाद ही जमा की जाएं। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से आज सुबह 11 बजे तक सरकार का रुख स्पष्ट करने को कहा है।
आरोपों का जवाब देते हुए, बीजेपी ने किस्त पर आपत्ति जताने के लिए कांग्रेस पर "महिला विरोधी" होने का आरोप लगाया। सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि लाडली बहना योजना के तहत सहायता को राजनीतिक कारणों से रोका नहीं जाना चाहिए।
मकर संक्रांति 14 जनवरी को है, जबकि महत्वपूर्ण बीएमसी चुनावों के लिए मतदान अगले दिन होगा। नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस को डर है कि मतदान से ठीक पहले पैसे ट्रांसफर करने से महिलाओं के वोटों का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी की ओर जा सकता है। बीएमसी चुनावों का महाराष्ट्र, खासकर मुंबई में बहुत अधिक राजनीतिक महत्व है। बीएमसी जीतने से न केवल राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है, बल्कि व्यापक प्रशासनिक शक्ति और वित्तीय नियंत्रण भी मिलता है। सभी प्रमुख पार्टियों ने इन चुनावों पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है।