मलेशिया के सुल्तान ने सुधारवादी नेता अनवर को देश का नया प्रधानमंत्री घोषित किया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 25, 2022

मलेशिया के सुल्तान अब्दुल्ला सुल्तान अहमद शाह ने सुधारवादी विपक्षी नेता अनवर इब्राहिम को बृहस्पतिवार को देश का नया प्रधानमंत्री घोषित किया। इससे मलेशिया में खंडित जनादे‍श वाले आम चुनावों के बाद कई दिनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता का अंत हो गया। सुल्तान ने कहा कि अनवर को बृहस्पतिवार शाम पांच बजे शाही महल में मलेशिया के दसवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। आम चुनाव में अनवर के नेतृत्व वाले गठबंधन पाकतन हरपन (उम्मीदों के गठबंधन) को सर्वाधिक 82 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

गतिरोध का समाधान उस समय हो गया, जब चुनाव में 30 सीटें जीतने वाले यूनाइटेड मलय नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (यूएमएनओ) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक ऐसी एकता सरकार का समर्थन करने की सहमति जता दी, जिसका नेतृत्व अनवर के हाथों में होगा। दोनों खेमों के बीच लंबे समय से जारी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते मलेशिया की राजनीति में कुछ समय पहले तक इस तरह के गठबंधन की कल्पना करना भी मुश्किल था।

बोर्नियो द्वीप में अच्छा-खासा प्रभाव रखने वाले कई छोटे राजनीतिक दलों ने भी अनवर के नेतृत्व में एकता सरकार के गठन के सुल्तान के फैसले का समर्थन करने की घोषणा की है। शाही महल की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया है, “सुल्तान सभी दलों को याद दिलाते हैं कि जीतने वाले सब कुछ नहीं जीतते और हारने वाले सब कुछ नहीं खोते।” सुल्तान ने अनवर और उनके नेतृत्व वाली नयी सरकार से विनम्र रहने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि सभी विरोधी दलों को एक स्थिर सरकार सुनिश्चित करने और मलेशिया की राजनीतिक उथल-पुथल को समाप्त करने के लिए सामंजस्य स्थापित करना चाहिए, जिसके कारण 2018 के चुनावों के बाद से देश के तीन प्रधानमंत्री बनाए जा चुके हैं। शाही महल ने बयान में कहा है कि सुल्तान इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि अनवर वह उम्मीदवार हैं, जो बहुमत साबित करने में सफल रहेंगे। हालांकि, बयान में नयी सरकार के स्वरूप के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

अनवर नीत बहुदलीय गठबंधन के सत्ता में आने पर मलेशिया में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़कने की आशंका जताए जाने के बाद पुलिस ने देशभर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अनवर के प्रधानमंत्री बनने से मुहीद्दीन के शासन में मलेशिया के बढ़ते इस्लामिकरण को लेकर उपजी चिंताओं के दूर होने और शासन प्रणाली में सुधार की पहल बहाल होने की उम्मीद जगी है।

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