By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 10, 2026
कोलकाता, नौ अगस्त पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रविवार को उत्तर 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस के जान गंवाने वाले एक कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने जाते समय भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन को घेर लिया, ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए और उनकी कार पर कथित तौर पर कीचड़, जूते और पत्थर फेंके। बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के उस कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने जा रही थीं, जिसकी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत हुई थी।
यह साजिश के अलावा कुछ नहीं है। मैंने पुलिस को पहले ही बता दिया था कि मैं आ रही हूं, इसके बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा की तो बात ही छोड़िए। पुलिस गुंडों को संरक्षण दे रही है।
बंगाल गुंडों के हाथों में चला गया है। हम मामला दर्ज कराएंगे।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनकी गाड़ी पर ईंट के बड़े-बड़े टुकड़े भी फेंके गए। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा सिर फट सकता था।
मेरी यहां मौत हो सकती थी। पुलिस भाजपा को संरक्षण दे रही है।’’ बनर्जी ने भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर उन्हें निशाना बनाने के लिए ‘‘गुंडों’’ का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि आरोप लगाया कि राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बनर्जी ने यह भी दावा किया कि दिवंगत कार्यकर्ता के परिवार को भाजपा समर्थकों द्वारा धमकाया जा रहा था। इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री के वाहन पर किसी भी तरह के हमले का समर्थन नहीं करती है और उन्होंने इस घटना में भाजपा कार्यकर्ताओं की संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस घटना की निंदा करते हैं और यदि ऐसी कोई घटना हुई है, तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अधीन पुलिस जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करेगी।’’ हालांकि बिजपुर से भाजपा विधायक सुदीप्त दास ने बनर्जी पर मौत से राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
दास ने कहा, ‘‘यह ममता बनर्जी की पुरानी राजनीति है। जिस तरह गिद्ध किसी शव की तलाश में रहता है, उसी तरह वह भी पश्चिम बंगाल में किसी मौत का इंतजार करती हैं और मीडिया में बने रहने का कोई न कोई रास्ता तलाशती हैं। वह राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक हो चुकी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक स्थानीय व्यक्ति और विधायक के तौर पर परिवार के साथ हूं।
हम लगातार उनके संपर्क में हैं। जिनके घर पर यह घटना हुई, वे लोग कुछ नहीं कह रहे हैं। उन्हें हम पर भरोसा है।’’ यह घटना जून में कलकत्ता उच्च न्यायालय के बाहर हुई उस घटना के दो महीने बाद हुई, जब बनर्जी परिसर से बाहर निकल रही थीं और उन्हें ‘‘चोर-चोर’’ के नारे सुनने पड़े थे।
उसी महीने उनके भतीजे एवं तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी सोनारपुर की यात्रा के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा था, जब प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले पर कथित तौर पर अंडे फेंके थे और इसी तरह के नारे लगाये थे। मृतक की पहचान बिरजू केवट के रूप में हुई है, जो कांचरापाड़ा की पूर्व नगरपालिका पार्षद जेनी शर्मा केवट के पति थे। उन्हें जबरन वसूली सहित अन्य आरोपों के सिलसिले में हालिशहर पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
उन्हें शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। शनिवार को उनकी मौत की खबर सामने आई। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि लॉक-अप के अंदर उन्हें पीटा गया और पुलिस की मारपीट के कारण उनकी मौत हुई।
इस आरोप पर पुलिस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। बनर्जी ने रविवार को परिवार से मुलाकात की और राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने देने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कृष्णानु मित्रा ने इस घटना की निंदा करते हुए बनर्जी की गाड़ी पर कथित रूप से पत्थर और कीचड़ फेंके जाने को “बेहद शर्मनाक और निंदनीय” बताया।
उन्होंने इस विरोध-प्रदर्शन को पुलिस हिरासत में केवट की मौत से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी दोनों घटनाओं का पुरजोर विरोध करेगी। बनर्जी के साथ लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी और राज्यसभा सदस्य डोला सेन भी मौजूद थीं। विरोध-प्रदर्शन के बाद दोनों ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा।
कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि शुभेंदु अधिकारी ‘‘पुलिस के जरिए राज्य चला रहे हैं” और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कथित माफिया तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर बनर्जी के सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती थी।