By अंकित सिंह | Aug 19, 2021
राजनीति में ना तो दुश्मनी स्थाई है और ना ही दोस्ती। राजनीति में बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच दोस्ती और दुश्मनी भी बनती-बिगड़ती रहती है। पश्चिम बंगाल में दोबारा सत्ता में वापसी के बाद ममता बनर्जी सियासी समीकरणों को अपने पक्ष में साधने की कोशिश में जुट गई हैं। हाल में ही पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को ममता बनर्जी की ओर से चाय पर आमंत्रण मिला। भले ही यह एक औपचारिक राजनीतिक मुलाकात हो सकती है लेकिन इसके बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का दावा है कि ममता बनर्जी अब भाजपा की राह पर निकल चुकी हैं। जिस तरह विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने में जुटी थी अब वही काम ममता बनर्जी करने की कोशिश में हैं। ममता बनर्जी भाजपा को अब बांटने की कवायद में जुट गई हैं। पहले मुकुल रॉय को अपने पक्ष में किया अब उनकी नजर दिलीप घोष पर है।
आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में दिलीप घोष भाजपा का मजबूत चेहरा माने जाते हैं। दिलीप घोष के अलावा मुकुल रॉय और बाबुल सुप्रियो भी बंगाल भाजपा के कद्दावर नेताओं में से थे। लेकिन दिलीप घोष अपनी पुरानी पार्टी में लौट चुके हैं तो वही बाबुल सुप्रियो ने भाजपा से अलग होने का ऐलान कर दिया है। विधानसभा चुनाव के बाद कई भाजपा नेता तृणमूल में शामिल हो गए थे। दिलीप घोष के समर्थक उन्हें बंगाल में भाजपा को फिर से जीवंत करने का श्रेय देते हैं। हाल में ही शुभेंदु अधिकारी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था जिसको लेकर मुकुल रॉय नाराज हो गए थे और माना जा रहा है कि दिलीप घोष भी पार्टी के इस कदम से नाराज हैं।