By अनन्या मिश्रा | Mar 05, 2025
पौराणिक कथा
कब होती है मंगला आरती
बता दें कि जन्माष्टमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं ब्रज वासियों के क्षेत्र में इस पर्व की अलग ही रौनक देखने को मिलती है। जन्माष्टमी के दिन मंगला आरती का आयोजन किया जाता है। इस दिन सबसे ज्यादा भक्त आरती में शामिल होते हैं। जन्माष्टमी पर रात 12 बजे श्रीबांके बिहारी जी का अभिषेक किया जाता है और फिर इसके बाद मंगला आरती की जाती है। दरअसल, इस दिन श्रीकृष्ण रास रचाने के लिए निधिवन नहीं जाते हैं।
क्यों नहीं होती है मंगला आरती
पौराणिक कथा के मुताबिक जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तो लाला की मनमोहक छवि को देखने के लिए सभी गांव वाले भाव-विभोर हो उठे। कान्हा के प्रति गांव वाले आकर्षित हो गए कि रोजाना लल्ला के दर्शन के लिए जाया करते थे।
इसी वजह से सभी ब्रजवासी रोजाना सुबह सबसे पहले नंद बाबा के घर पहुंच जाते और दूर से खड़े होकर लल्ला को निहारा करते। उस दौरान भगवान की आरती का समय होता था, लेकिन गांव वाले आरती में नहीं जाया करते थे।
असल में ब्रज वासियों को श्रीकृष्ण से इतना अधिक प्यार था कि उनको लगता था कि यदि उन्होंने पूजा के लिए घंटी बजाई तो कान्हा की नींद खुल जाएगी। वहीं छोटे से कृष्ण-कन्हैया शोर सुनकर डर जाएंगे और रोने लगेगा।
वहीं जब स्वामी हरिदास जी ने बांके बिहारी जी की स्थापना की, जब भी व्रजवासियों को यही भाव याद आया। तब से लेकर अब तक इसी प्रेम भाव की वजह से बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती नहीं होती है।