Mani Shankar Aiyar ने Pakistan से बातचीत की वकालत की, अटारी वाघा बॉर्डर पर वार्ता का दिया सुझाव

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 04, 2026

श्रीनगर, चार अक्टूबर पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार की रविवार को आलोचना की और कहा कि सरकार के पास ‘‘सर्जिकल स्ट्राइक’’ करने का साहस तो है, लेकिन मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत करने की इच्छाशक्ति नहीं है। अय्यर ने यहां पांचवें ‘हल्ला बोल कॉन्क्लेव’ में बोलते हुए अटारी-वाघा सीमा पर बातचीत करने का सुझाव दिया और कहा कि अतीत के मुद्दों को लेकर बहस करना विदेश नीति नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि हमारे पास उनके खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है।

क्या दुनिया में कोई ऐसा देश है जिसके साथ पाकिस्तान हमसे ज्यादा आसानी से बातचीत कर सकता है?’’ पाकिस्तान के साथ पहले हुई वार्ता प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए अय्यर ने सवाल किया, ‘‘हम वहां जाने और उन्हें यहां आने देने का साहस क्यों नहीं दिखाते?’’ उन्होंने कहा, ‘‘और अगर आपमें वह साहस नहीं है, तो मेरा सुझाव है कि हम वाघा-अटारी में मिलें। हमारी सीमा रेखा पर ही एक मेज रख दें, ताकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल हमसे बातचीत करने के लिए पाकिस्तान से बाहर न आए और हमें उनसे बात करने के लिए भारत से बाहर न जाना पड़े। और इस संवाद को जारी रखें।’’ उन्होंने कहा कि बातचीत से यह तय किया जा सकता है कि किन मुद्दों का समाधान हो सकता है और किनका नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां भी कोई समाधान निकलता है, उस पर कार्रवाई करें। और जिन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ है, उन्हें यह कहते हुए फिलहाल टाल दें कि अभी इस पर सहमति बनती नहीं दिख रही है, लेकिन हम बातचीत जारी रखेंगे। जब माहौल बदलेगा, तब इन लंबित मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अतीत को लेकर बहस करना विदेश नीति नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि किसी भी तरह के रचनात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता उनसे बातचीत करना है, चाहे इसमें कितना भी समय लगे। अमेरिकियों ने रूसियों के साथ यही किया। उन्होंने कभी राजनयिक संबंध नहीं तोड़े और न ही बातचीत बंद की।

समझदार देश एक-दूसरे से बात करते हैं, मूर्ख देश एक-दूसरे से बात नहीं करते।’’ देश के राजनीतिक हालात से जुड़े सवाल पर अय्यर ने कहा कि ‘‘भारतीय राजनीतिक माहौल में जो गलत है, उसे ठीक करना बहुत आसान है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए आपको (पीडीपी अध्यक्ष) महबूबा मुफ्ती द्वारा कश्मीरियों को दी गई सलाह का पालन करना होगा। उन्होंने कहा था कि जब तक सभी कश्मीरी एक आवाज में एकजुट नहीं होंगे, तब तक दिल्ली पर कश्मीर के अलग-अलग नेताओं के वहां जाने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यही बात राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर भी लागू होती है, जिसे सभी गैर-हिंदुत्व राजनीतिक समूह के एकजुट होने पर ही ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम दिल्ली में होते तो कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिल गया होता।

कश्मीर को शायद अनुच्छेद 370 और 35ए भी वापस मिल गए होते, संभवतः थोड़े अलग स्वरूप में। लेकिन अगर आप प्रगति चाहते हैं, तो असहमत लोगों को एकजुट होना होगा। और अगर हम एकजुट होते हैं, तो पाकिस्तान के साथ नई पहल कर सकते हैं।

प्रमुख खबरें

Gurugram में The Westerlies के निवासियों ने खामियों पर Builder के खिलाफ खोला मोर्चा

IIT Delhi के पीएचडी छात्र की मौत मामले में Supreme Court के निर्देश पर FIR दर्ज

BJP 2027 में Himachal Pradesh की सत्ता में लौटेगी: Shrikant Sharma

Israel के पीएम Netanyahu ने भारतीय पायलट Smit Machhar की बहादुरी को सराहा, स्वतंत्रता दिवस पर दिया न्योता