पुन: प्रारंभ होगा माणिकचंद्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार: मुख्यमंत्री चौहान

By दिनेश शुक्ल | Dec 28, 2020

भोपाल। प्रख्यात पत्रकार मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी एक कर्मयोगी, राष्ट्रभक्त, अहंकार शून्य, सागर-सी गहराई और आकाश-सी ऊँचाई रखने वाले व्यक्तित्व थे। मामा जी का जीवन राग-द्वेष से सर्वथा मुक्त था, वह सभी को समान भाव से देखते थे, इसलिए आज भी लाखों कार्यकर्ताओं और सैकड़ों पत्रकारों के लिए मामाजी का समर्पित जीवन प्रेरणापुंज है। यह बात रविवार को भोपाल स्थित मिंटो हॉल में आयोजित मामाजी के जीवन पर आधारित डाक टिकट विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चौहान ने कही। मुख्यमंत्री ने गीता से आदर्श मनुष्य के गुणों को श्लोक के माध्यम से उद्धृत करते हुए कहा कि आपातकाल की संघर्ष-गाथा और अन्य ग्रंथों के माध्यम से मामाजी ने अलग पहचान बनाई। उन्होंने अनेक प्रतिभाओं को निखारा। वे सहज, सरल, समर्पित और स्वाभिमानी थे।

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जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि मामाजी ने पूरा जीवन समाज के लिए जिया। वे प्रेरणा के केन्द्र थे। उन्होंने संगठन को महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। आपातकाल में कारावास गये। उन्होंने बताया कि उनके जीवन की दिशा तय करने में भी मामाजी का योगदान था। वे मामाजी ही थे जिन्हों ने ग्वालियर संघ कार्यालय में उनके लिए रहने की व्यवस्था की जिसके कारण आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि वास्तव में जैसा मैं सोचता हूं वैसा कई कार्यकर्ता सोचते होंगे। मुझे आज बहुत प्रसन्नता है कि भारत सरकार ने मामाजी के जीवन को याद किया और उन पर डाक टिकट जारी कर उनके विचारों को मान्यता प्रदान की है। उन्होंने इस बात के लिए प्रदेश की वर्तमान शिवराज सरकार को धन्य वाद दिया कि उन्होंयने पुन : सत्ता  में आते ही ध्येय निष्ठत पत्रकारिता के लिए दिया जाने वाला राष्ट्रीय पुरस्कार पुन : देने का निर्णय लिया है।

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वहीं, उनका कहना था कि समाज जीवन में सामान्यतः तीन प्रकार के व्यक्ति देखने को मिलते हैं एक वह जो स्वयं के लिए जीते हैं, दूसरे प्रकार के अपने व परिवार के लिए जीने वाले होते हैं और तीसरे में ऐसे लोग आते हैं जो अपने और और को समाज का माध्यम बना कर समाज जीवन के लिए अपना जीवन जीते हैं वास्तव में मामाजी उन व्यक्तियों में से थे जो हम सब के लिए समाज के लिए जीकर प्रेरणा के स्तोत्र बने हैं।

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