By अंकित सिंह | Nov 02, 2023
कार्यकर्ता मनोज जरांगे गुरुवार को मराठा आरक्षण के लिए अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने पर सहमत हो गए। यह घटनाक्रम सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों संदीप शिंदे, एमजी गायकवाड़ और अधिकारियों सहित अन्य लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा जारांगे से मुलाकात के बाद आया है। चर्चा के दौरान जरांगे ने पूरे महाराष्ट्र में मराठों के लिए आरक्षण की अपनी मांग दोहराई। उन्होंने "पूर्ण आरक्षण" की मांग की और राज्य सरकार से इस पर उन्हें अपना "शब्द" देने को कहा। मीडिया के सामने रिटायर जज से बातचीत हुई। जारांगे ने मांग की कि सरकार को मराठा समुदाय के आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन के सर्वेक्षण के लिए टीमें तैनात करनी चाहिए।
मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान राज्य भर में हिंसा भड़क उठी और कई विधायकों के घरों में आग लगा दी गई। बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दोहराया कि उनकी सरकार मराठा आरक्षण के लिए है। इसके अलावा महाराष्ट्र के चार मंत्रियों ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से मुलाकात की, उनसे नौ दिन से जारी अनशन खत्म करने का अनुरोध किया। मंत्री ने मनोज जारांगे से कहा कि महाराष्ट्र विधानमंडल में मराठा आरक्षण पर आठ दिसंबर को चर्चा होगी। मनोज जरांगे ने कहा कि अगर दो महीने में कोई निर्णय नहीं लिया गया तो मुंबई में मराठा आरक्षण विरोध का नेतृत्व करेंगे। मंत्रियों द्वारा अनशन खत्म करने के लिए मनाने के बाद कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने कहा, ''जब तक सभी मराठों को आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक मैं अपने घर में प्रवेश नहीं करूंगा''