By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 04, 2026
मथुरा बुधवार को होली के रंगों में सराबोर हो गया। इस दौरान भक्तों और स्थानीय लोगों ने पारंपरिक उत्साह के साथ होली मनाई। श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा कि मंदिर के बाहर होली खेली जा रही है, लेकिन गर्भगृह के अंदर नहीं मनाई जा रही है क्योंकि मंदिर का होली उत्सव होलिका दहन के दिन समाप्त हो जाता है।
गोवर्धन तहसील के बछगांव गांव में ‘चप्पल’ होली मनाई जाती है, जहां गांव के बुजुर्ग बच्चों को चप्पलों से खेल-खेल में मारते हैं। स्थानीय निवासी योगेश कुंतल ने बताया कि यह एक-दूसरे के प्रति बिना किसी द्वेष के खेलने की परंपरा है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि 150 साल पुरानी यह परंपरा कभी अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध करने के लिए शुरू की गई थी, इस दौरान हुरियारे गुलाल उड़ाए जाते हैं और होली के गीतों पर नृत्य भी किया जाता है। पुराने केशवदेव मंदिर के सेवायत बिहारीलाल गोस्वामी ने बताया कि शाम को भजन संध्या और फूलों की होली का कार्यक्रम रखा गया है।
उन्होंने कहा कि उस दिन मंदिर परिसर के अंदर होली नहीं मनाई जाती है। श्री गरुण गोविंद मंदिर में सेवायत डॉक्टर राजेश गौतम ने कहा कि रंगभरी एकादशी से एक दिन पहले होली का त्योहार पारंपरिक हुरंगा के साथ समाप्त होता है। स्थानीय व्यापारी हर्ष चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘मथुरा में होली दूसरी जगहों से अलग है क्योंकि यहां हम भगवान कृष्ण की लीलाओं में से एक को फिर से जीते हैं। पिछले 30 दिनों से शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े समारोह हो रहे हैं।’’
मथुरा में सुबह से ही लोग होली के गानों पर नाचते और एक-दूसरे को रंग लगाते दिखाई दिए। पेशे से प्रोफेसर दीक्षा चौधरी ने कहा, मथुरा में होली मुझे खुशी देती है। मैं कृष्ण के करीब महसूस करती हूं। होली के मौके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त भी किए गए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण क्षेत्र) सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि पूरे जिले को नौ जोन और 40 सेक्टर में बांटा गया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस टीमें तैनात की गई हैं।