By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 11, 2026
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को विपक्षी दलों खासतौर पर समाजवादी पार्टी पर अपनी पार्टी के परंपरागत नीले रंग को अपनाने को लेकर तंज कसते हुए कहा कि इससे न तो इनकी संकीर्ण सामंती सोच बदलने वाली और न ही ये लोग दिल से आंबेडकरवादी होने वाले हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा था कि पार्टी की छात्र इकाई ‘छात्र सभा’ ने नीली टी-शर्ट और जींस को नये ‘ड्रेस कोड’ के तौर पर अपनाया है। मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के अपने आधिकारिक हैंडल पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बसपा का शुरू से ही चला आ रहा नीला रंग अब इनके गले के गमछे व कपड़ों तथा स्टेज आदि में भी इस्तेमाल होने लगा है।’’ विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि नीला रंग इस्तेमाल करने से सर्व समाज में से खासकर गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामंतवादी और पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती और न ही ये लोग दिल से अंबेडकरवादी हो सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मामले में सोच, चाल, चरित्र और चेहरा से बेईमान रही है और इसके कई उदाहरण हैं तथा वे भी यह जानते हैं। मायावती ने कहा कि इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी और आंबेडकरवादी पार्टी केवल बसपा ही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ‘छात्र सभा’ के नये ‘ड्रेस कोड’ के लिए नीले रंग को चुने जाने के पीछे की वजह बताते हुए कहा था कि नीला रंग विचारधारा, लोकतंत्र, संविधान, आकाश, ‘बहुजन समाज’ और बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़ा हुआ है।
इससे पहले, सपा ‘छात्र सभा’ के कार्यकर्ता लाल शर्ट या कुर्ता पहनते थे।