MEA Weekly Briefing: भारत ने US और China को लेकर अपनाया सख्त रुख, अमेरिकी नेताओं के झूठ भी कर दिये उजागर

By नीरज कुमार दुबे | Jan 09, 2026

भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साथ कई मोर्चों पर भारत का स्पष्ट और सख्त रुख सामने रखा। अमेरिका के साथ व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, चीन पाकिस्तान गठजोड़, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले, वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाएं और कूटनीतिक मर्यादा जैसे मुद्दों पर भारत ने न केवल तथ्य रखे बल्कि संदेश भी दिया कि दबाव और दुष्प्रचार से हमारी नीति नहीं बदलेगी।

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भारत अमेरिका व्यापार समझौते पर भी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से आये हालिया बयानों को गलत करार दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले वर्ष फरवरी से भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते पर बातचीत कर रहे हैं और कई बार सहमति के करीब भी पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत हुई है। देखा जाये तो यह तथ्य उन दावों को खारिज करता है जिनमें कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच संवाद नहीं है। विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों नेताओं के संबंध मैत्रीपूर्ण हैं और कूटनीतिक मर्यादा के अनुरूप परस्पर सम्मान पर आधारित हैं।

साथ ही चीन की आक्रामक गतिविधियों पर भी भारत ने बेहद सख्त भाषा में प्रतिक्रिया दी है। हम आपको बता दें कि शक्सगाम घाटी में चीन द्वारा सीपेक के तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण को भारत ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि 1963 का तथाकथित चीन पाकिस्तान सीमा समझौता अवैध और अमान्य है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि चीन को बार बार चेताया गया है कि वह जमीनी हकीकत बदलने की कोशिश न करे। साथ ही चीन से कहा गया है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

इसके अलावा, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के मुद्दे पर भारत ने वहां की सरकार के इंकार को खतरनाक प्रवृत्ति बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह का इंकार अपराधियों का मनोबल बढ़ाता है और यह जमीनी सच्चाई से मुंह मोड़ने के बराबर है। वहीं न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय ने संयमित लेकिन कड़ा संदेश देते हुए कहा कि किसी भी लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। सिंधु जल संधि पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल स्थगन की स्थिति में है। साथ ही कई वैश्विक संस्थाओं से अमेरिका के बाहर चले जाने पर भारत ने कहा है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान परामर्श और सहयोग से ही संभव है। इसी क्रम में उन्होंने यह भी बताया कि जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज 12 और 13 जनवरी को भारत यात्रा पर आ रहे हैं और अहमदाबाद में द्विपक्षीय वार्ता होगी जिसमें सभी प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

देखा जाये तो विदेश मंत्रालय की यह ब्रीफिंग दरअसल भारत की बदलती कूटनीतिक मुद्रा का आईना है। भारत न तो दबाव में आता है और न ही अस्पष्ट भाषा में जवाब देता है। अमेरिका हो या चीन, भारत साफ शब्दों में अपनी प्राथमिकताएं और सीमाएं तय कर रहा है। 500 प्रतिशत शुल्क की धमकी हो या रूसी तेल पर उपदेश, भारत का जवाब एक ही है कि ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। वहीं चीन के मामले में बयान केवल प्रतिक्रिया नहीं बल्कि चेतावनी है। शक्सगाम घाटी और सीपेक का मुद्दा यह दिखाता है कि भारत अब हर मंच पर अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की बात मुखरता से रखता है। यह रुख उस दौर से अलग है जब ऐसे मुद्दों को टालने की कोशिश होती थी।

इसके अलावा, अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता पर तथ्य रखकर भारत ने यह भी दिखाया कि दुष्प्रचार का जवाब आंकड़ों और संवाद से दिया जा सकता है। मोदी और ट्रंप के आठ संवाद यह साबित करते हैं कि ऐसे लोगों के दावे गलत हैं जो कहते हैं कि मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया इसलिए भारत और अमेरिका व्यापार वार्ता पटरी से उतर गयी।

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