प्यार की हताशा ने शराबी बना दिया... और मीना कुमारी ने मौत को चुन लिया

By रेनू तिवारी | Aug 01, 2022

90 फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी से सिनेमा में अपना लोहा मनवाने वाली मीना कुमारी को इंडस्ट्री में ट्रेजेडी क्वीन के नाम से हर कोई जानता है। लेकिन उनकी दमदार अदाकारी ने बॉलीवुड में उन्हें नया नाम भी दिया था वो था- फीमेल गुरु दत्त। मीना कुमारी का जन्म मुंबई में 1 अगस्त, 1932 को हुआ था। उनका असली नाम महजबीं बानो था। मायानगरी के जानकार बताते हैं कि मीना कुमारी का बचपन बहुत ही तंगहाली में गुजरा था। उन्होंने जीवन के दर्द को जीया इसलिए उनकी फिल्मों में कोई भी दुख का दृश्य उनके अभिनय से जीवंत हो उठता था।

मीना कुमारी को नाम, इज्जत, शोहरत, काबिलियत, रुपया, पैसा सब कुछ मिला पर सच्चा प्यार नहीं। मीना कुमारी ने अपनी खूबसूरती से करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया। बला की खूबसूरत मीना कुमारी के साथ हर कलाकार काम करना चाहता था। इतना ही नहीं उनके ऐसे कई दीवाने भी थे जो उनके इश्क में पागल थे।

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मीना कुमारी इतनी खूबसूरत थीं कि कई एक्टर्स उनके प्यार में पागल हो गए थे। आलम तो ये था कि अपने जमाने के सुपरस्टार रहे राजकुमार भी उनके दीवाने थे। जब सेट पर मीना डायलॉग्स बोलती, या एक्टिंग करती, तो राजकुमार एकटक उन्हें देखते, और कई बार अपने डायलॉग्स ही भूल जाते थे।

मीना कुमारी की शादी

मीना कुमारी ने अपनी एक्टिंग के दम पर एक ऐसा इतिहास रचा जिसे भुला पाना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं हैं। मीना को असली पहचान साल 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा' से मिली। मीना कुमारी की मुलाकात 1951 में कमाल अमरोही से हुई थी। उसी दौरान मीना कुमारी के कार का एक्सीडेंट हुआ था, तब कमाल साहब ने मीना कुमारी का बहुत ख्याल रखा था। जिसके कारण दोनों करीब आ गए। साल 1952 में मीना कुमारी और कमाल अमरोही ने गुपचुप तरीके से निकाल कर लिया लेकिन धीरे-धीरे मीना कुमारी और कमाल के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और फिर 1964 में मीना कुमारी कमाल से अलग हो गईं।

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मीना के प्यार ने धर्मेंद्र को बनाया सुपरस्टार

इस अलगाव की वजह अभिनेता धर्मेद्र थे, जिन्होंने उसी समय अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत की थी। उस समय मीना कुमारी के सितारे बुलंदियों पर थे, उनकी एक के बाद एक फिल्म हिट हो रही थी। मीना कुमारी बॉलीवुड के आसमां का वो सितारा थीं, जिसे छूने के लिए हर कोई बेताब था। मीना कुमारी के रूप में धर्मेद्र के कॅरियर की डूबती नैया को किनारा मिल गया था और धीरे-धीरे धर्मेद्र के करियर ने भी रफ्तार पकड़ी। अपनी शोहरत के बल पर मीना कुमारी ने धर्मेद्र के करियर को ऊंचाइयों तक ले जाने की पूरी कोशिश की। कहा जाता है कि फिल्म ‘फूल और कांटे’ की सफलता के बाद, धर्मेद्र ने मीना कुमारी से दूरियां बनानी शुरू कर दीं और एक बार फिर से मीना कुमारी अपनी जिंदगी में तन्हा रह गईं। धर्मेद्र की बेवफाई को मीना झेल न सकीं और हद से ज्यादा शराब पीने लगीं।

फिल्म ‘पाकीजा’ के रिलीज होने के तीन हफ्ते बाद, मीना कुमारी गंभीर रूप से बीमार हो गईं। 28 मार्च, 1972 को उन्हें सेंट एलिजाबेथ के नर्सिग होम में भर्ती कराया गया। मीना ने 29 मार्च, 1972 को आखिरी बार कमाल अमरोही का नाम लिया, इसके बाद वह कोमा में चली गईं। मीना कुमारी महज 39 साल की उम्र में मतलबी दुनिया को अलविदा कह गई। मौत को पहले ही मीना शायद अपना चुकी थी इसी लिए उन्होनें अपनी शायरी में ये कहा था।

- रेनू तिवारी

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