By अभिनय आकाश | Oct 27, 2026
मर्क और मॉडर्ना ने ट्यूमर निकालने की सर्जरी के बाद, मेलानोमा के मरीजों पर एक प्रायोगिक पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन, 'इंटिसमेरन' (intismeran) का परीक्षण किया है। इम्यूनोथेरेपी दवा 'कीट्रूडा' (Keytruda) के साथ दिए जाने पर, इस कॉम्बिनेशन ने दो साल के भीतर कैंसर के दोबारा होने या मौत के जोखिम को 42 प्रतिशत तक कम कर दिया। इसमें 82 प्रतिशत मरीज कैंसर-मुक्त रहे, जबकि केवल कीट्रूडा लेने वालों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत था। यह पहली बार है जब किसी पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन ने तीसरे चरण (फेज 3) का ट्रायल पास किया है; यह वैक्सीन मरीज के ट्यूमर में मौजूद म्यूटेशन के आधार पर विशेष रूप से तैयार की जाती है। हालांकि, मरीजों के जीवित रहने (ओवरऑल सर्वाइवल) से जुड़े पूरे आंकड़े अभी आने बाकी हैं, और यह थेरेपी स्वस्थ लोगों में कैंसर को रोकने के लिए नहीं बनाई गई है। साथ ही, इस विशेष वैक्सीन को अभी तक वैश्विक स्तर पर रेगुलेटरी मंजूरी नहीं मिली है और यह भारत में भी उपलब्ध नहीं है।
मेलानोमा इंस्टीट्यूट ऑस्ट्रेलिया की मुख्य शोधकर्ता जॉर्जिना लॉन्ग ने 2026 यूरोपियन सोसाइटी फॉर मेडिकल ऑन्कोलॉजी (ESMO) कांग्रेस में इन निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। उनके सहयोगी एलेक्स मेंजीस ने कहा कि इस तरीके को आगे चलकर अन्य प्रकार के कैंसरों पर भी लागू किया जा सकता है, खासकर उन कैंसरों पर, जिन पर मौजूदा इम्यूनोथेरेपी का असर बहुत कम होता है। हालाँकि, इन नतीजों की कुछ सीमाएँ भी हैं। पूरे निष्कर्ष अभी तक किसी पीयर-रिव्यूड जर्नल में प्रकाशित नहीं हुए हैं, और 58 प्रतिशत की कमी मरीजों के एक उप-समूह (सबग्रुप) में देखी गई थी। इसका मतलब यह है कि मुख्य ट्रायल के नतीजों की तुलना में इसे अधिक सावधानी से समझने की जरूरत है। इसके अलावा, पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन हर मामले में सफल नहीं रही हैं। हाल ही में आंत के कैंसर और सिर व गर्दन के कैंसर के ट्रायल में, इसी तरह के तरीके कैंसर को दोबारा होने से रोकने में विफल रहे हैं। इससे पता चलता है कि अलग-अलग तरह के कैंसर के लिए प्रभावी इलाज विकसित करना कितनी बड़ी चुनौती है।