By अभिनय आकाश | Oct 27, 2026
एक तरफ सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव चरम पर है तो दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच भी टकराव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। अमेरिका की ओर से ईरान पर दोबारा हमले की चर्चाओं के बीच मिडिल ईस्ट में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। लेकिन इसी बीच 26 अक्टूबर को ईरान की राजधानी तेहरान में कुछ ऐसा हुआ जिसने सबका ध्यान खींचा है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बड़े अधिकारी ईरान पहुंच गए और चारों देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ बैठकर क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर चर्चा की। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन देशों के हित अलग-अलग हैं, वे अचानक एक साथ क्यों आए हैं? क्या यह देश मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को रोकने की कोशिश कर रहे हैं? या फिर अमेरिका की रणनीति से अलग क्षेत्रीय सुरक्षा का कोई नया रास्ता तलाशा जा रहा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी बैठक को क्षेत्रीय सुरक्षा की दिशा में एक व्यावहारिक कदम बताया। उनके मुताबिक पिछले दो वर्षों की घटनाओं ने साबित किया है कि आपसी भरोसे के बिना क्षेत्र में स्थाई शांति कायम करना मुश्किल है। इस बैठक को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह देश अमेरिका की रणनीति से अलग अपना रास्ता तैयार कर रहे हैं? पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की एक रक्षा समझौते के सदस्य हैं, जिसे मक्का रक्षा समझौते के नाम से जाना जाता है। इस समझौते के बाद तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की ईरान की यह पहली संयुक्त यात्रा है। ईरान चाहता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले पश्चिमी देशों के बजाय इसी क्षेत्र के देश मिलकर करें। ईरानी अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि पड़ोसी देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर सुरक्षा का ऐसा ढांचा तैयार किया जा सकता है जिसमें बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत कम हो। वहीं इस बैठक का एक दूसरा पहलू सऊदी अरब और ईरान के रिश्ते हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव रहा है।