By अभिनय आकाश | Oct 27, 2026
संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक जांच में पाया गया है कि रूस ने यूक्रेन में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमले किए, जिससे कड़ाके की ठंड में लाखों लोग बिजली और हीटिंग (गर्मी) के बिना रहने को मजबूर हो गए। यह कृत्य युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है। जांच में इस बात के भी सबूत मिले हैं कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए, भारत सहित 29 देशों के लोगों को धोखे या दबाव के जरिए अपनी सेना में भर्ती किया, ताकि वे यूक्रेन में लड़ सकें। फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किए जाने के कुछ ही समय बाद, जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक स्वतंत्र जांच आयोग को अधिकृत किया था। सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की मानवाधिकार समिति को सौंपी गई इसकी पहली रिपोर्ट, यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर रूस के व्यापक हमलों के असर पर केंद्रित थी।
आयोग ने बताया कि उसके निष्कर्ष 255 यूक्रेनियनों के बयानों पर आधारित हैं, जिन्होंने 2025-26 में कीव और आठ अन्य क्षेत्रों में सर्दियों की कठिन परिस्थितियों का सामना किया था। इसके अलावा, इसमें सरकारी अधिकारियों, डॉक्टरों और नागरिक संगठनों से मिली जानकारी को भी शामिल किया गया है। मोसे ने कहा कि रूस ने आयोग की किसी भी रिपोर्ट (जिसमें हालिया रिपोर्ट भी शामिल है) पर टिप्पणी करने के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया है। संयुक्त राष्ट्र में रूस के मिशन ने सोमवार को कहा कि वह आयोग के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देता है और दावा किया कि इसके निष्कर्ष गलत आंकड़ों पर आधारित हैं। पूरे युद्ध के दौरान, रूस का यही कहना रहा है कि उसकी सेना यूक्रेन में केवल सैन्य या सैन्य-संबंधी ठिकानों, या यूक्रेनी सशस्त्र बलों के हितों से जुड़े स्थानों को ही निशाना बनाती है—भले ही कई रिपोर्टों और सबूतों से कुछ और ही पता चलता हो।