By Ankit Jaiswal | Oct 22, 2026
सोशल मीडिया कंपनी मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को कैलिफोर्निया में बनाए रखने के लिए कंपनी ने एक खास समझौता किया है। इसके तहत जुकरबर्ग को ऐसे नए शेयर दिए जाएंगे, जिन्हें बेचकर वह जरूरत पड़ने पर अरबों डॉलर का संभावित संपत्ति कर चुका सकेंगे। इसके बदले उन्होंने 8 साल तक कैलिफोर्निया या उस राज्य में रहने की प्रतिबद्धता जताई है, जहां मेटा का मुख्यालय होगा। कंपनी ने बुधवार को इस समझौते की जानकारी दी।
फोर्ब्स के अनुसार, मार्क जुकरबर्ग दुनिया के छठे सबसे अमीर व्यक्ति हैं और उनकी कुल संपत्ति करीब 240 अरब डॉलर है। कैलिफोर्निया में करीब 250 अरबपति रहते हैं, जिनकी कुल संपत्ति 2 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा बताई जाती है। हालांकि, प्रस्ताव 40 के पास होने की संभावना अभी निश्चित नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रस्ताव के भविष्य को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
मेटा के समझौते के अनुसार, जुकरबर्ग को मिलने वाले नए C श्रेणी के शेयरों में से वह तुरंत 20% बेच सकेंगे। ये शेयर कंपनी में उनकी कुल आर्थिक हिस्सेदारी के करीब 10% के बराबर होंगे। इन शेयरों को बेचकर वह संभावित कर का भुगतान कर सकते हैं, जबकि कंपनी में उनका मतदान संबंधी नियंत्रण बना रहेगा। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें कर चुकाने के लिए मतदान अधिकार वाले शेयर बेचने की जरूरत न पड़े।
कंपनी ने यह भी बताया कि जनवरी 2027 में बिना मतदान अधिकार वाले C श्रेणी के नए शेयर जारी किए जाएंगे। इस व्यवस्था से कंपनी के शेयरों का 2:1 के अनुपात में विभाजन प्रभावी होगा। मेटा का कहना है कि इस कदम से भविष्य में दूसरी कंपनियों को खरीदने, प्रतिभाशाली कर्मचारियों को कंपनी में बनाए रखने और कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि मेटा इन दिनों एआई के क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही है। कंपनी के अनुमान के अनुसार, आने वाले वर्षों में इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए उसे कई सौ अरब डॉलर जुटाने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए पूंजी की जरूरत 2026 की सर्दियों से ही शुरू हो सकती है।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के निदेशक मंडल की एक विशेष समिति ने भी माना कि जुकरबर्ग का नेतृत्व में बने रहना कंपनी के लिए बेहद जरूरी है। समिति के मुताबिक, एआई के कारण तकनीकी उद्योग में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है और ऐसे समय में कंपनी को अपने कैलिफोर्निया मुख्यालय से ही नेतृत्व देना अहम है।
बता दें कि यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब कैलिफोर्निया में अरबपतियों पर प्रस्तावित कर को लेकर बहस तेज है। जहां इसके समर्थक इसे सरकारी खर्च के लिए अतिरिक्त धन जुटाने का तरीका मानते हैं, वहीं विरोधियों को आशंका है कि इससे बड़े कारोबारी राज्य छोड़ सकते हैं। मेटा का यह कदम दिखाता है कि कर नीतियां अब बड़ी तकनीकी कंपनियों के नेतृत्व, निवेश और भविष्य की योजनाओं को भी प्रभावित कर रही हैं।