Career Tips: मेट्रो ड्राइवर और लोको पायलट होते हैं एक-दूसरे से अलग, जानिए दोनों के बीच क्वालिफिकेशन और भर्ती प्रोसेस

By अनन्या मिश्रा | Apr 03, 2025

हमारे देश भारत में रेल परिवहन का अहम योगदान है। जिसमें मेट्रो ट्रेन और भारतीय रेलवे दोनों की अलग-अलग और महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मेट्रो ऑपरेटर या मेट्रो पायलट मेट्रो ट्रेन को चलाते हैं। तो वहीं लोको पायलट भारतीय रेलवे की ट्रेनों को चलाते हैं। दोनों ही चुनौतीपूर्ण पेशे हैं। लेकिन इन दोनों की योग्यता, कार्यप्रणाली और भर्ती प्रक्रिया में काफी अंतर होता है। क्या आपको मेट्रो ड्राइवर और लोको पायलट में अंतर पता है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मेट्रो ड्राइवर और लोको पायलट के बीच के अंतर के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। साथ ही इन दोनों की भर्ती प्रक्रिया और योग्यता के बारे में भी जानेंगे।

मेट्रो ड्राइवर और लोको पायलट में अंतर

अर्बन ट्रांसपोर्ट के लिए मेट्रो ड्राइवर होते हैं। तो वहीं इंटरसिटी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लोको पायलट होते हैं।

मेट्रो ड्राइवर का काम काफी आसान होता है, क्योंकि अधिकतर ट्रेन ऑटोमेटिक होती हैं। वहीं लोको पायलट को ट्रेनों का मैनुअल कंट्रोल और निगरानी करनी होती है।

बता दें कि मेट्रो ड्राइवर्स को तय समय के अंदर शिफ्ट में कार्यभार संभालना होता है। वहीं लोको पायलट को लंबी दूरी के साथ अधिक समय तक काम करना पड़ता है।

मेट्रो ड्राइवर की भर्ती DMRC, LMRC, MMRC द्वारा निकाली वैंकेसी के तहत किया जाता है। जबकि लोको पायलट के लिए RRB यानी की भारतीय रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा की जाती है।

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योग्यता

मेट्रो ड्राइवर के लिए कैंडिडेट्स को मैथ और साइंस से 12वीं पास होना जरूरी है। या फिर इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, सिविल की डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए।

वहीं कुछ मेट्रो सिस्टम ITI डिग्री वाले कैंडिडेट्स को भी मौका देते हैं।

इसके अलावा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को प्राथमिकता दी जाती है।

मेट्रो ड्राइवर

इसके लिए लिखित परीक्षा पास करनी होती है। लिखित परीक्षा में गणित, रीजनिंग, जनरल नॉलेज और तकनीकी ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

इसके बाद ट्रेन ऑपरेशन से जुड़ी मानसिक क्षमता जांचने के लिए साइकोमेट्रिक टेस्ट होता है।

फिर कैंडिडेट्स का इंटरव्यू किया जाता है, जिसमें व्यवहारिक ज्ञान और तकनीकी संबंधित सवाल पूछे जाते हैं।

फिर लास्ट में मेडिकल टेस्ट होता है।

वहीं चयनित उम्मीदवारों को 6 महीने से 1 साल तक के लिए ट्रेनिंग दी जाती है।

ट्रेनिंग के दौरान कैंडिडेट्स को रियल ट्रेन ऑपरेशन, सिमुलेटर और सेफ्टी आदि नियमों की जानकारी दी जाती है।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद कैंडिडेट्स को असिस्टेंट ऑपरेटर या ऑपरेटर के रूप में ज्वॉइनिंग दी जाती है।

जानिए लोको पायलट के लिए योग्यता

लोको पायलट बनने के लिए कैंडिडेट्स का 10वीं पास होने के साथ ITI या फिर इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा होना अनिवार्य है।

इस पद के लिए बीटेक डिग्री वाले कैंडिडेट्स को प्राथमिकता जी जाती है।

रेलवे में भर्ती के लिए कैंडिडेट्स का कम से कम 60% अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है।

ऐसे बन सकते हैं लोको पायलट

लोको पायलट बनने के लिए RRB की तरफ से सीबीटी टेस्ट लिया जाता है। इसमें रीजनिंग, गणित, विज्ञान, तकनीकी और सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे जाते हैं।

इस टेस्ट को पास करने के बाद साइकोमेट्रिक टेस्ट लिया जाता है। जिसमें उम्मीदवार की प्रतिक्रिया समय और निर्णय लेने की क्षमता की परख की जाती है।

लास्ट में डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट होता है। जिसमें फिटनेस, आंखों की रोशनी और हेल्थ की जांच की जाती है।

जिन उम्मीदवारों का चयन हो जाता है उनको रेलवे ट्रेनिंग सेंटर में 6 महीने से 1 साल तक की ट्रेनिंग दी जाती है।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उम्मीदवार को लोको पायलट के तौर पर पोस्टिंग दी जाती है।

वहीं एक्सपीरियंस और अनुभव के आधार पर सीनियर लोको पायलट और चीफ लोको पायलट के पद तक जाने का अवसर मिलता है।

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