लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम उम्र तय करना इस्लाम के खिलाफ नहीं, पाकिस्तान शीर्ष इस्लामिक कोर्ट का बयान

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 29, 2021

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की शीर्ष इस्लामी अदालत ने फैसला सुनाया है कि लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित करना इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ नहीं है। उसने एक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें बाल विवाह निरोधक कानून की कुछ धाराओं को चुनौती दी गई थी। इस फैसले से बाल विवाह पर एक विवाद सुलझ सकता है, जो कट्टरपंथी मुसलमानों के इस आग्रह से उपजा है कि इस्लाम ने शादी के लिए कोई उम्र तय करने की अनुमति नहीं दी है।

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निर्णय बताता है कि शिक्षा का महत्व आत्म-व्याख्यात्मक है और शिक्षा की आवश्यकता सभी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है, चाहे वह किसी भी लिंग का हो। फैसले में कहा गया है, इसीलिए इस्लाम में हर मुसलमान के लिए शिक्षा हासिल करना अनिवार्य है, जैसा कि एक हदीस में कहा गया है कि हर मुसलमान के लिए ज्ञान हासिल करना अनिवार्य है। फैसले में कहा गया है कि एक स्वस्थ विवाह के लिए न केवल शारीरिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता आवश्यक कारक हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और बौद्धिक विकास भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें शिक्षा के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि शिक्षा महिला सशक्तिकरण के लिए मौलिक है क्योंकि यह किसी व्यक्ति और फलस्वरूप किसी भी राष्ट्र की भावी पीढ़ी के लिए के विकास की कुंजी है। खबर के मुताबिक जॉर्डन, मलेशिया, मिस्र और ट्यूनीशिया जैसे कई इस्लामी देश ऐसे हैं जहां पुरुष और महिला के लिए शादी की न्यूनतम उम्र तय है।

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