ग्वालियर-चंबल को लेकर संतुलित नजर आ रहे CM शिवराज, दोनों कद्दावर नेताओं को बैठाया अपने पास

By अनुराग गुप्ता | May 23, 2022

भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने अपनी रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस भाजपा पर सत्ता चुराने का आरोप लगाती है तो दूसरी तरफ भाजपा खुद को सत्ता में जमाए रखने की कावयद में जुटी हुई है। समय-समय पर भाजपा में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को लेकर गुटबाजी की खबरें आती रही हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी एकजुट है। 

संतुलन बनाने की हुई कोशिश ?

मुख्यमंत्री रविवार को ग्वालियर में देवराज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एवं अस्पताल के भूमि-पूजन समारोह में शामिल हुए। मंच पर मुख्यमंत्री के एक तरफ उनकी पत्नी साधना सिंह जबकि दूसरी तरफ सिंधिया दिखाई दिए। ऐसे में मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी को उठाकर उस स्थान पर नरेंद्र सिंह तोमर को बैठाया और विधानसभा चुनाव से पहले संदेश देने की कोशिश की कि ग्वालियर-चंबल इलाके में सबकुछ ठीक है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह तोमर को बगल में बैठाकर यह स्पष्ट कर दिया कि ग्वालियर-चंबल में न कोई टकराव की स्थिति है और न ही नेताओं के बीच कोई प्रतिस्पर्धा है। हम सब एकजुट हैं। लेकिन यह एकजुटता चुनावों के वक्त दिखाई देती है या नहीं ? यह देखना काफी दिलचस्प होगा।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अपने पुराने कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह का कद बढ़ाने में जुटी हुई है। प्रदेश में दिग्विजय सिंह के करीबियों और उनके खेमे के नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही है। हाल ही में कांग्रेस ने सात बार विधायक रहे डॉ. गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। दरअसल, कांग्रेस सात बार विधायक रहे गोविंद सिंह के माध्यम से ग्वालियर-चंबल संभाग में पार्टी की स्थिति को मजबूत करना चाहती है। 

इसे भी पढ़ें: MP में OBC समुदाय को साधने में जुटे नेता, CM शिवराज बोले- ओबीसी विरोधी रहा है कांग्रेस का इतिहास 

माना जा रहा है कि ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस के पास कोई बड़ा नेता उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गोविंद सिंह के माध्यम से पार्टी अपनी स्थिति को उस क्षेत्र में सुधारने की कोशिश कर रही है क्योंकि इस क्षेत्र की 34 सीटों के दम पर ही भाजपा की फिर से सरकार बन पाई है और कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी। ऐसे में कांग्रेस को कोई ऐसा दमदार नेता चाहिए था जो भाजपा से दो-दो हाथ कर सके और गोविंद सिंह को इसमें माहिर ही हैं। दरअसल, गोविंद सिंह हमेशा से ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुखर विरोधी रहे हैं।

प्रमुख खबरें

PM Narendra Modi ने जनप्रतिनिधि के 25 साल पूरे होने पर जताया जनता का आभार

V-Neck से लेकर Off-Shoulder तक, गरबा ड्रेसेस की नेकलाइन के अनुसार अपनाएं ये Hairstyle

Flydubai विमान में घायल कैप्टन Smit Machhar की डेंटिस्ट ने बचाई जान

GE Aerospace ने HAL को सौंपे 4 नए F404 इंजन, Tejas Mk1A फ्लीट को मिलेगी मजबूती