By नीरज कुमार दुबे | May 11, 2026
मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बिगड़ती स्थिति के बीच केंद्र सरकार ने आज देश की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील को भी दोहराया गया, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने तथा ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आग्रह किया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल और ईंधन का भंडार पूरी तरह सुरक्षित और पर्याप्त है। सुजाता शर्मा के अनुसार सरकार ने बीते दिनों में कई प्रभावी कदम उठाए हैं ताकि ईंधन आपूर्ति सामान्य बनी रहे और आम लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां अपनी सर्वोत्तम क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कहीं भी पेट्रोल पंपों पर ईंधन समाप्त होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि रसोई गैस वितरकों के पास भी पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध है और घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। पिछले तीन दिनों में एक करोड़ चौबीस लाख से अधिक गैस बुकिंग के मुकाबले एक करोड़ छब्बीस लाख सिलेंडर घरों तक पहुंचाए गए हैं। वहीं व्यावसायिक एलपीजी की बिक्री भी सत्रह हजार टन से अधिक रही है। इसके साथ ही वाहन उपयोग में आने वाली ऑटो एलपीजी की बिक्री सात सौ बासठ टन से अधिक दर्ज की गई है।
बैठक में बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगने वाले कथित कर को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत को इस मार्ग से गुजरने के लिए किसी प्रकार का कर नहीं देना पड़ता है। सरकार के इस बयान का उद्देश्य उन अटकलों को शांत करना था जिनमें कहा जा रहा था कि तनाव के कारण भारत पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
हम आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। देश में पेट्रोल की कीमत लगभग चौरानवे रुपये सतहत्तर पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब सतासी रुपये सड़सठ पैसे प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई है। ये दरें लगभग दो वर्षों से अपरिवर्तित हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू दरों के बीच बढ़ते अंतर का असर सरकारी तेल कंपनियों पर साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियां इंडियन आयल निगम, भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड लगातार भारी घाटे का सामना कर रही हैं। बीते दस सप्ताह में इन कंपनियों का कुल नुकसान एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
सूत्रों के मुताबिक ये तीनों कंपनियां प्रतिदिन लगभग सोलह सौ करोड़ से सत्रह सौ करोड़ रुपये तक की कम वसूली झेल रही हैं। इसके बावजूद कंपनियां उपभोक्ताओं पर बढ़ती वैश्विक कीमतों का पूरा बोझ नहीं डाल रही हैं। सरकार ने फिलहाल इन कंपनियों के लिए किसी राहत पैकेज की घोषणा नहीं की है।