AI समिट में मोदी की मेगा डिप्लोमेसी: Estonia, Serbia, Croatia, Finland, Spain के साथ नई शुरुआत

By नीरज कुमार दुबे | Feb 18, 2026

AI इम्पैक्ट समिट में भागीदारी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समानांतर रूप से एक सक्रिय कूटनीतिक मिशन भी साधते दिख रहे हैं। समिट से इतर विभिन्न देशों के नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि भारत वैश्विक मंचों का उपयोग केवल बहुपक्षीय चर्चाओं तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उन्हें रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने के अवसर में भी बदल रहा है। डिजिटल तकनीक, व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार जैसे मुद्दों पर हुई ये वार्ताएं बताती हैं कि मोदी सरकार भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए साझेदारियां गढ़ रही है और भारत की वैश्विक भूमिका को लगातार विस्तार दे रही है।


जहां तक प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय वार्ताओं की बात है तो आपको बता दें कि उनकी और एस्टोनिया के राष्ट्रपति की मुलाकात कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) इम्पैक्ट समिट के इतर ऐसे समय हुई जब डिजिटल सहयोग वैश्विक कूटनीति का अहम आधार बनता जा रहा है। दोनों नेताओं ने भारत-एस्टोनिया संबंधों की विभिन्न धाराओं की समीक्षा की और खास तौर पर डिजिटल टेक्नोलॉजी, ई-गवर्नेंस और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं के ऐतिहासिक समापन और उसके शीघ्र क्रियान्वयन पर भी सहमति जताई गई। सामरिक दृष्टि से एस्टोनिया, जो डिजिटल गवर्नेंस में विश्व अग्रणी माना जाता है, भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए उपयोगी साझेदार है। बाल्टिक क्षेत्र में एस्टोनिया के साथ मजबूत रिश्ते भारत की यूरोप नीति को भी मजबूती देते हैं।

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वहीं सर्बिया के राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, निवेश, AI, फिनटेक, शिक्षा, कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और सर्बिया के संबंध ऐतिहासिक रूप से गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौर से ही मित्रतापूर्ण रहे हैं, जिनकी नींव आपसी विश्वास और जन-जन के रिश्तों पर टिकी है। सामरिक रूप से सर्बिया दक्षिण-पूर्व यूरोप में एक महत्वपूर्ण देश है, जहां भारत अपनी आर्थिक और तकनीकी उपस्थिति बढ़ाकर यूरोपीय बाजारों तक पहुंच मजबूत कर सकता है। रक्षा उद्योग, फार्मा और आईटी सेक्टर में सहयोग की संभावनाएं भी भारत के लिए दीर्घकालिक लाभ का आधार बन सकती हैं।


उधर, क्रोएशिया के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में भारत-क्रोएशिया संबंधों को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया गया। AI, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने भारत-ईयू FTA को जल्द लागू करने की जरूरत दोहराई। क्रोएशिया के लोगों में भारतीय संस्कृति, योग और आयुर्वेद के प्रति बढ़ती रुचि का भी उल्लेख हुआ, जो सॉफ्ट पावर के जरिए संबंधों को गहरा करता है। सामरिक नजरिए से क्रोएशिया एड्रियाटिक सागर क्षेत्र का अहम देश है और यूरोप में लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में भारत के लिए अवसर खोलता है।


इसके अलावा, स्पेन के राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात बहुआयामी साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित रही। रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, नवाचार, स्वास्थ्य, जलवायु कार्रवाई और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। 2026 को भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन और AI वर्ष के रूप में मनाने की पहल दोनों देशों के रिश्तों को जनस्तर तक ले जाने का प्रयास है। विश्वविद्यालयों के बड़े प्रतिनिधिमंडल का भारत आना अकादमिक और शोध सहयोग की संभावनाएं बढ़ाता है। सामरिक दृष्टि से स्पेन यूरोपीय संघ और लैटिन दुनिया के बीच सेतु का काम करता है, इसलिए उसके साथ गहरे रिश्ते भारत को व्यापक भू-राजनीतिक और आर्थिक लाभ दे सकते हैं।


साथ ही, फिनलैंड के प्रधानमंत्री के साथ हुई विस्तृत वार्ता में व्यापार दोगुना करने, डिजिटलाइजेशन, AI रिसर्च, नैतिक नवाचार, 6G, स्वच्छ ऊर्जा, बायोफ्यूल और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। फिनलैंड को एक उभरते नवाचार केंद्र के रूप में सराहा गया और जिम्मेदार AI विकास पर साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई। सामरिक रूप से फिनलैंड नॉर्डिक क्षेत्र का टेक-पावरहाउस है, जहां शिक्षा, रिसर्च और ग्रीन टेक्नोलॉजी में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता है। भारतीय प्रतिभा और फिनिश नवाचार का मेल भविष्य की अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत कर सकता है।


बहरहाल, इन सभी बैठकों से स्पष्ट है कि भारत यूरोप के साथ अपने रिश्तों को केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उन्हें तकनीक, व्यापार, संस्कृति और जनसंपर्क के जरिए बहुआयामी बना रहा है। AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर फोकस बताता है कि भारत दीर्घकालिक रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। विभिन्न यूरोपीय देशों के साथ समानांतर रूप से रिश्ते मजबूत करना भारत की संतुलित और सक्रिय विदेश नीति का संकेत है। प्रधानमंत्री मोदी की यह कूटनीति भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद, दूरदर्शी और प्रभावशाली साझेदार के रूप में स्थापित करती है और इसके लिए उनकी कूटनीतिक पहल की सराहना की जानी चाहिए।


- नीरज कुमार दुबे 

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