By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 10, 2021
वाशिंगटन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 के संसदीय चुनाव के प्रचार अभियान में शहरी मध्यम वर्ग को आकर्षित करने और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के वास्ते राष्ट्रवाद से पूर्ण सांस्कृतिक रूप से मजबूत भारत को चित्रित करने के लिए ट्विटर का इस्तेमाल किया था। एक प्रवासी भारतीय (एनआरआई) प्रोफेसर के नेतृत्व में किए अध्ययन में यह दावा किया गया। अमेरिका में ‘इंटरनेशनल कम्युनिकेशन रिसर्च जर्नल’ द्वारा प्रकाशित शोध, भारत के 2019 के चुनाव में राजनेताओं द्वारा ट्विटर के उपयोग पर केन्द्रित है। अमेरिका के मिसौरी में ‘पार्क यूनिवर्सिटी’ में सहायक प्रोफेसर एवं शोध के प्रमुख लेखक अभिजीत मजूमदार ने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य यह अध्ययन करना था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 74 दिनों के प्रचार अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी द्वारा ट्विटर का उपयोग कैसे किया गया।’’ इस अध्ययन का शीर्षक ‘ट्वीटिंग टू विन: एनालिसिस सोशल मीडिया यूज इन इंडियाज 2019 नेशनल इलेक्शन’ है और तीन शोधकर्ता इसके सह-लेखक हैं। अन्य दो लेखक भावना वाल और उमाना अंजलिन हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि मोदी ने अभियान के दौरान एक दिन में औसतन 10 से अधिक ट्वीट किए, जो अध्ययन के अनुसार, प्रधानमंत्री द्वारा सोशल मीडिया के बहुत प्रभावी उपयोग की ओर इशारा करता है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सांख्यिकीय विश्लेषण के जरिए शोधकर्ताओं ने तीन प्रमुख तथ्यों की पहचान की जिसमें मोदी ने गांधी से अधिक ट्वीट किए और वे थे राष्ट्रवाद, संस्कृति और राजनीतिक गठबंधन। जबकि, गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था की निराशाजनक स्थिति के बारे में ट्वीट किए और यह बताने की कोशिश की कि देश में सब ठीक नहीं है। अध्ययन में पाया गया कि जबकि दोनों राजनेताओं ने कई मुद्दों के बारे में ट्वीट किया, लेकिन उन्होंने ग्रामीण गरीबों के विकास संबंधी मुद्दों पर कम ध्यान केन्द्रित किया। मोदी ने केवल तीन प्रतिशत और गांधी ने पांच प्रतिशत ट्वीट विकास के संबंध में किए। मजूमदार ने इसके लिए भारत में ग्रामीणों के बीच इंटरनेट की कमी को एक बड़ा कारण बताया। साथ ही दोनों राजनेताओं के ट्वीट में धर्म और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों का कम उल्लेख पाया गया। दोनों ने सुरक्षित राह चुनी और अभियान के दौरान विभाजनकारी मुद्दों में तल्लीन होने से परहेज किया। उन्होंने कहा, ‘‘ राहुल गांधी भारत के लिए एक वैकल्पिक योजना बताने के लिए ट्विटर का उपयोग करने में कम सफल रहे, जिसका मोदी ने पूरी निपुणता के साथ इस्तेमाल किया।