Hal Shashthi 2026: संतान की खुशहाली के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें पूजन के लिए सही Shubh Muhurat

By अनन्या मिश्रा | Sep 02, 2026

हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी का व्रत किया जाता है। इस बार 02 सितंबर 2026 को हल षष्ठी का व्रत किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। हल षष्ठी को चंदन षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं संतान की दीर्घायु, सुख और बेहतर सेहत के लिए व्रत करती हैं। महिलाएं इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है। तो आइए जानते हल षष्ठी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर महुए की दातून से दांत साफ करें और स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल पर गाय के गोबर से हल छठ माता, हल, सप्तऋषि, पशु और किसान से संबंधित चित्र बनाएं। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें। फिर चौकी पर भगवान गणेश और मां पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें।

फिर विधिविधान से पूजा-अर्चना करें और मिट्टी के कुल्हट में ज्वार की धानी और महुआ आदि रखें। वहीं मटकी में देवली-छेवली रखें। सबसे पहले हल छठ माता की पूजा करें, इसके बाद कुल्हड़ और मटकी की पूजा करें। इस पूजा में 7 तरह के अनाज, धूल के साथ भुना हुआ चना, आभूषण और हल्दी से रंगा हुआ वस्त्र अर्पित करें। परंपरा के मुताबिक भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन करें। फिर हल छठ की कथा सुनें। पूजा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की आरती करें।

महत्व

हरछठ का पर्व सिर्फ संतान की सुख-समृद्धि से जुड़ा पर्व नहीं बल्कि इस पर्व का संबंध ग्रामीण और कृषि जीवन से भी है। हल को भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र माना जाता है। इसलिए इस पर्व में हल और खेती से संबंधित वस्तुओं का विशेष महत्व माना जाता है। इस व्रत को करने से माताओं को संतान की अच्छी सेहत और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।

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