By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 25, 2026
मध्यप्रदेश में पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी से हासिल रकम को सफेद करने के लिए कथित तौर पर फर्जी खातों का इस्तेमाल करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि मामले में जांच के दौरान विभिन्न राज्यों में दर्ज करीब 50 शिकायतों से संबंधित तकरीबन 80 लाख रुपये के लेन-देन का भी पता चला है। पुलिस के अनुसार, इन लेनदेन से संबंधित शिकायतें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार और झारखंड सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज की गई हैं।
आरोपियों ने कथित तौर पर इंस्टाग्राम विज्ञापनों के माध्यम से लोगों से बैंक खाते किराए पर लिए, साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त आय को उनमें जमा किया, और जल्दी से पैसे को अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया। उन्होंने बताया कि जांच में यह भी संकेत मिला है कि धन को क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा रहा है। पुलिस ने बताया कि अब तक संदिग्ध बैंक खातों में साइबर अपराध के करीब 80 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है।
पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने बताया कि मोहित चौबे नाम के एक व्यक्ति ने हाल ही में खजुराहो पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि टेलीग्राम ऐप के माध्यम से ऑनलाइन रेटिंग बढ़ाकर पैसे दोगुने करने की पेशकश के साथ उससे करीब 28 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसने धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों, ऑनलाइन लेनदेन और संचार चैनलों का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि जांच में नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव इलाके में सक्रिय एक गिरोह की कथित संलिप्तता का पता चला है, जिसके बाद पुलिस ने अभियान शुरू किया और सोमवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में 1.5 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं और उनके पास से कई एटीएम कार्ड, बैंक खाते खोलने के लिए इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन और 38,000 रुपये नकद जब्त किए हैं। सकलेचा ने बताया कि आरोपियों की पहचान नरसिंहपुर के गोटेगांव निवासी शुभम उर्फ शिवम पटेल, नीरज पटेल, कैलाश उर्फ केवल रजक और हीरालाल उर्फ संदीप रजक के रूप में हुई है। उन्होंने कहा कि आगे की जांच चल रही है और गिरोह में अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।