By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 11, 2026
भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में औपचारिक कर्ज का करीब 60 लाख करोड़ रुपये का अंतर है। मौजूदा संस्थागत माध्यम छोटे उद्यमों की कर्ज की मांग का केवल 30-40 प्रतिशत ही पूरा कर पाते हैं। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई।
बेन एंड कंपनी-एनपीसीआई भारत बिलपे लिमिटेड द्वारा तैयार रिपोर्ट में एकीकृत डिजिटल परिवेश की पहचान चार प्रमुख सक्षम कारकों में से एक के रूप में की गई है, जो इसकी पूरी क्षमता को सामने लाने में मदद कर सकते हैं। ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ में जारी रिपोर्ट में कहा गया कि मानकीकृत एपीआई पर आधारित केंद्रीकृत एवं परस्पर संचालनीय डिजिटल प्रणाली लागू करने से मौजूदा प्रणालियों में न्यूनतम बदलाव के साथ ऑर्डर से भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इससे हर महीने जारी होने वाले 20 करोड़ से अधिक जीएसटी ई-बिल का मिलान स्वचालित किया जा सकेगा और खरीदार द्वारा पुष्टि किए गए बिल को वित्तपोषण योग्य रिकॉर्ड में बदला जा सकेगा।
इससे पारंपरिक जमानत आधारित ऋण के साथ-साथ नकदी प्रवाह के आधार पर कर्ज देने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। बेन एंड कंपनी में वित्तीय सेवा कारोबार के भागीदार एवं भारत के प्रमुख सौरभ त्रेहन ने कहा, ‘‘भारत में डिजिटल भुगतान की पहुंच में काफी प्रगति हुई है लेकिन कारोबारी प्रणालियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, बैंकों, वित्तदाताओं व सार्वजनिक प्रणालियों से जुड़ी कई बी2बी (व्यवसाय से व्यवसाय) प्रक्रियाएं अब भी काफी हद तक अलग-अलग हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत में बी2बी बदलाव के अगले चरण का मतलब केवल धन को तेजी से स्थानांतरित करना नहीं है बल्कि अंतर्निहित लेनदेन को समग्र परिवेश में दिखाई देने योग्य, सत्यापन योग्य और कार्रवाई योग्य बनाना है।’’ एनपीसीआई भारत बिलपे लिमिटेड (एनबीबीएल) की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नूपुर चतुर्वेदी ने कहा कि बी2बी कारोबार का भविष्य परस्पर संचालन क्षमता पर आधारित होगा। कंपनियों को बिल, भुगतान, मिलान और वित्तपोषण को साझा डिजिटल बुनियादी ढांचे के जरिये जोड़ने की जरूरत तेजी से महसूस होगी।
उन्होंने कहा कि एक मानकीकृत और जुड़ा हुआ परिवेश अलग-अलग कारोबारी प्रक्रियाओं को भरोसेमंद डिजिटल प्रक्रियाओं में बदल सकता है। साथ ही उन एमएसएमई के लिए कर्ज की पहुंच बेहतर कर सकता है, जिन्हें पर्याप्त वित्तीय सुविधा नहीं मिल पाती। रिपोर्ट में कहा गया कि एक साझा और भरोसेमंद सूचना प्रणाली एमएसएमई को किए जाने वाले करीब आठ लाख करोड़ रुपये के विलंबित भुगतान के पीछे मौजूद कुछ सूचना असंगतियों को दूर करने में भी मदद कर सकती है।
एकल और सत्यापित डिजिटल मंच भुगतान में देरी करने वाली विसंगतियों को दूर करने में मदद कर सकता है। इनमें चालान के विवरण का मेल नहीं खाना, आपूर्ति की पुष्टि नहीं होना और खरीद आदेशों का सत्यापन नहीं होना शामिल हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को किए जाने वाले लंबित भुगतानों का कुल मूल्य करीब आठ लाख करोड़ रुपये है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इसके अलावा, इस डिजिटल प्रणाली में कृत्रिम मेधा (एआई) तथा स्मार्ट डेटा उपकरणों को जोड़ने से नकदी प्रवाह संबंधी जानकारी, गतिशील जोखिम आकलन, एजेंट आधारित कर्ज आकलन और खुले बाजार से जुड़ी जानकारी के जरिये इन लाभों को और बढ़ाया जा सकता है। इससे व्यापार की पूरी प्रक्रिया को स्वचालित करने की क्षमता पैदा होगी।