Sambhaji Death Anniversary: जब Mughal शासक औरंगजेब झुका न सका Sambhaji Maharaj का सिर, दीं थीं बर्बर यातनाएं

By अनन्या मिश्रा | Mar 11, 2026

आज ही के दिन यानी की 11 मार्च को छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी महाराज का निधन हो गया था। इस दिन ही क्रूर शासक औरंगजेब ने संभाजी की हत्याकर दी थी। औरंगजेब ने संभाजी से इस्लाम कुबूल करने के लिए कहा था, जिस पर संभाजी ने इंकार कर दिया था इसलिए औरंगजेब के आदेश पर उनकी जुबान खींच ली थी। संभाजी महाराज देश के महान मराठा योद्धा थे। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर संभाजी महाराज के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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जब बंदी बने

संभाजी सिर्फ 9 साल के थे, तब उनको एक समझौते के तहत राजपूत राजा जय सिंह के यहां बंदी के रूप में रहना पड़ा। जब शिवाजी महाराज ने मुगल शासक औरंगजेब को चकमा देकर आगरा से भागे थे, उस दौरान संभाजी भी अपने पिता के साथ थे। शिवाजी खतरा भांपकर संभाजी को एक रिश्तेदार के घर मथुरा छोड़ दिया और उनके मरने की अफवाह फैला दी। हालांकि कुछ समय बाद वह महाराष्ट्र सही-सलामत पहुंचे।

बगावती थे संभाजी

संभाजी शुरूआत से ही बगावत करने वाले थे और गैर-जिम्मेदार भी थे। जिस कारण 1678 में शिवाजी ने उनको पन्हाला किले में कैद कर दिया। जहां से वह भाग निकले और मुगलों से मिल गए। लेकिन उनको जल्द ही मुगलों की साजिश समझ आई और वह वापस महाराष्ट्र लौट आए। लेकिन महाराष्ट्र लौटने के बाद उनको फिर से बंदी बना लिया गया।

युवराज से बने राजा

अप्रैल 1680 में शिवाजी महाराज की मृत्यु हो गई, इस दौरान संभाजी पन्हाला में कैद थे। इस दौरान शिवाजी के दूसरे बेटे राजाराम को सिंहासन पर बिठाया गया। लेकिन संभाजी अपने शुभचिंतकों की मदद से कैद से बाहर आ गए और 18 जून 1680 को रायगढ़ पर कब्जा ले लिया। वहीं 20 जुलाई 1680 को संभाजी की ताजपोशी हुई।

मुगलों से जंग

सत्ता में आने के बाद संभाजी महाराज ने मुगलों से कई युद्ध किए। उन्होंने बुरहानपुर शहर पर हमला किया और उसको बर्बाद कर दिया। जिसके बाद से मुगलों से उनकी दुश्मनी खुली रही। वहीं 1687 में मुगलों और मराठा फौज में जबरदस्त लड़ाई हुई। लेकिन जीत मराठाओं की हुई। हालांकि उनकी सेना काफी कमजोर हो गई थी। इस युद्ध में उनके सेनापति औऱ संभाजी के विश्वासपात्र हंबीरराव मोहिते की मृत्यु हो गई थी। इस दौरान संभाजी के खिलाफ षड्यंत्रों का बाजार गर्म होने लगा।

संभाजी को किया गया कैद

फरवरी 1689 में संभाजी को एक बैठक के लिए संगमेश्वर पहुंचे। यहां पर उन पर घात लगाकर हमला किया। इस हमले में संभाजी और उनके सलाहकार कविकलश को कैद करके बहादुरगढ़ ले जाया गया। इस दौरान संभाजी के सामने इस्लाम कुबूल करने की शर्त रखी। लेकिन संभाजी ने यह शर्त मानने से इंकार कर दिया। इंकार करने पर संभाजी और कविकलश को बुरी तरह से पीटा गया। उनकी जुबान खींच ली गई।

मृत्यु

वहीं 11 मार्च 1689 को संभाजी के शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके उनकी जान ले ली गई।

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