By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 10, 2026
हैदराबाद, नौ अगस्त हैदराबाद स्थित ‘राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान अकादमी’ के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और शिक्षकों को पत्र लिखकर आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया है। विश्वविद्यालय के 2026 बैच के कुछ छात्रों ने 23 जुलाई को भेजे गए एक ई-मेल में कहा कि उनकी चिंता इसको लेकर उपजी है कि प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए शांतिपूर्ण ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादती से संबंधित याचिका तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति नहीं दी। छात्रों ने कहा कि वे आगामी दीक्षांत समारोह के लिए सीजेआई को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के प्रस्ताव को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं।
दीक्षांत समारोह ऐसा अवसर होता है, जहां विश्वविद्यालय के अपने मूल्यों, जिनमें संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत विचार-विमर्श शामिल है, का चयन में स्पष्ट रूप से प्रतिबिंब दिखना चाहिए।” उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि ऐसे किसी सम्मानित व्यक्ति से डिग्री प्राप्त करना, जिनके हालिया सार्वजनिक आचरण के बारे में सामने आई खबरों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने प्रदर्शनकारी नागरिकों पर पुलिस ज्यादती के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज किया, राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान अकादमी में हमें सिखाए गए मूल्यों के साथ असहज स्थिति पैदा करता है।” छात्रों ने कहा कि संसद तक निकाला गया शांतिपूर्ण मार्च कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा आयोजित किया गया था और प्रदर्शनकारियों ने नीट परीक्षा के संचालन तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार जैसे मुद्दे उठाए थे। उन्होंने कहा, “हम यह मुद्दा अब उठा रहे हैं, जब तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, ताकि हमारे विचारों को समय रहते ध्यान में रखा जा सके।” छात्रों ने विश्वविद्यालय से अनुरोध किया कि वह दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के चयन पर “गंभीरता से पुनर्विचार” करे और अंतिम निर्णय लेने या निमंत्रण भेजने से पहले स्नातक बैच से परामर्श करे। एक छात्र ने रविवार को बताया कि उन्हें इस ई-मेल पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।