By अभिनय आकाश | Jul 29, 2026
अगर आपसे दुनिया की खुफिया एजेंसियों के बारे में पूछा जाए तो सबसे पहले आप भारत की रॉ का नाम लेंगे। उसके बाद अमेरिका की सीआईए, इजराइल की मुसाद, पाकिस्तान की आईएसआई का नाम भी चर्चा में रहता है। आप में से कुछ लोग यह भी बता देंगे कि सोवियत यूनियन की हुविया एजेंसी केजीबी अब रूस की एफएसबी बन गई है। लेकिन चीन का नाम आते ही आप अटक जाएंगे। आपने शायद कभी ध्यान ही नहीं दिया होगा कि चीन की सीक्रेट एजेंसी का नाम क्या है? लोग आमतौर पर चीन की खुफिया एजेंसी के बारे में कभी बात ही नहीं करते। इसी वजह से चीन की खुफिया एजेंसी बेहद खतरनाक बन गई है। दरअसल चीन की खुफिया एजेंसी का नाम एमएसएस है। एमएसएस यानी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी।
बहरहाल अब सवाल है कि चीनी खुफिया एजेंसी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी का सबसे पहला और बड़ा टारगेट कौन है? तो आपको बता दें कि चीनी खुफिया एजेंसी का सबसे बड़ा टारगेट चीनी लोग ही हैं जो विदेशों में रहते हैं। इसके बाद अमेरिका और भारत का नंबर आता है। विदेशों में रहने वाले लोगों पर चीन इसलिए नजर रखता है ताकि वह चीन की खुफिया जानकारी किसी और को ना दे दे। चीन कैसा देश है? वहां सरकार कैसे काम करती है? वहां के लोग क्या सोचते हैं? इसकी जानकारी दुनिया में किसी को नहीं होती। यहां तक कि चीनी लोग चीन में बने सोशल मीडिया ऐप ही यूज करते हैं।
भारत के लिए खतरे वाली बात यह है कि चीन अब सिर्फ अपने एजेंट्स के जरिए ही जानकारियां नहीं जुटा रहा बल्कि चीन की कंपनियां भी भारत की जासूसी कर रही हैं। चीनी गैजेट्स लगातार भारतीय लोगों के बिहेवियर और चॉइसेस पर नजर रखते हैं। यह गैजेट्स जानकारी जुटाते हैं कि भारत के लोगों की पसंद क्या है और नापसंद क्या है। इसी के बाद लोगों का ब्रेन वाश शुरू किया जाता है। बहरहाल, चीन से बढ़ते जासूसी खतरों के बीच भारत सरकार ने इंटरनेट आधारित सीसीटीवी कैमरों के नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव कर दिया है।