नंदीग्राम हारा लेकिन बंगाल जीता! हार कर भी जीतने वाले को 'ममता दीदी' कहते हैं

By रेनू तिवारी | May 03, 2021

कोलकाता। कहते है कि 'हार के जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं' यह कहावत इस समय ममता बनर्जी  पर ज्यादा सटीक बैठती है। ममता दीदी ने पश्चिम बंगाल में जिस तरह से अपनी जीत का परचम लहराया है उन्होंने ये साबित कर दिया है। बंगाल को भीतर से समझने वाली केवल ममता दीदी ही हैं। ममता दीदी भले ही नंदीग्राम से चुनाव हार गयी हो लेकिन सुवेन्दु अधिकारी को जिस तरह से उन्होंने कांटे की टक्कर दी वह वाकई काबिले तारीफ थी। बंगाल की ये सीट सबसे मुश्किल सीट थी लेकिन ममता ने सुवेन्दु की चुनौती को स्वीकार किया और इस नंदीग्राम से चुनाव लड़ने पहुंच गयी। ममता की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस ने राज्य विधानसभा चुनाव में बहुमत प्राप्त किया और ममता हार के भी बाजी मार गयी। इस लिए हार के भी ममता ने जीत हासिल की।इस लिए हमने कहा कि  'हार के जीतने वाले को बाजीगर (ममता दीदी) कहते हैं'।

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पार्टी को लगभग 48 प्रतिशत मत मिले हैं। उम्मीदवारों के कोविड-19 से पीड़ित होने के बाद दो निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान टाल दिया गया था। बनर्जी ने अपने समर्थकों से कहा, ‘‘यह बंगाल के लोगों की जीत है।’’ हालांकि नंदीग्राम से बनर्जी की खुद की हार की खबर ने उनकी खुशी को थोड़ा कम कर किया। बनर्जी अब तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के करीब हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से जश्न न मनाने को कहा। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने यह भी कहा कि राज्य में महामारी से निपटना उनकी प्राथमिकता होगा। वहीं, प्रतिद्वंद्वी भाजपा की राज्य की सत्ता में काबिज होने की आकांक्षा अधूरी रह गई और वह शाम तक आए परिणामों और रुझानों के अनुसार केवल 21 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी तथा 53 पर आगे चल रही है। भाजपा के लिए यह 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम के विपरीत है जब इसने 18 लोकसभा सीट जीतकर 120 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बहुमत हासिल किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न था तथा उन्होंने भाजपा को जीत दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी ने 200 से अधिक सीट जीतने का दावा किया था, लेकिन वह इस आंकड़े के कहीं आसपास तक भी नहीं पहुंच पाई और इससे काफी दूर रह गई। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अपने कई सांसदों एवं केंद्रीय मंत्रियों को भी उतार दिया था।

प्रधानमंत्री अपनी प्रचार सभाओं में बनर्जी पर निशाना साधते समय प्राय: ‘दीदी ओ दीदी’ कहते थे, लेकिन उनकी यह कटाक्ष शैली भी बनर्जी को शिकस्त देने में योगदान नहीं दे पाई। पश्चिम बंगाल में 34 साल तक शासन करनेवाला वाम मोर्चा और राज्य में दो दशक तक सत्ता में रही कांग्रेस इस विधानसभा चुनाव में बिलकुल औंधे मुंह जा गिरी है। बहुत से लोग अब ये कयास लगाने लगे हैं कि अपनी पार्टी की इस बार की जीत से उत्साहित बनर्जी अब 2024 के आम चुनाव में भाजपा को चुनौती देने के लिए अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की कोशिश करेंगी।

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