National Consumer Rights Day: अपने उपभोक्ता अधिकारों के प्रति अनभिज्ञ है बड़ी आबादी

By योगेश कुमार गोयल | Dec 24, 2022

अनिल ने सही समय पर अपना बिजली का बिल जमा करा दिया किन्तु फिर भी विभाग ने बिजली कनैक्शन काट दिया। राकेश के साथ जोखिम अवधि के दौरान ही दुर्घटना होने पर भी बीमा कम्पनी क्लेम का भुगतान नहीं कर रही। रमेश ने बाजार से बिजली का एक पंखा खरीदा लेकिन एक वर्ष की गारंटी होने के बावजूद सिर्फ दो महीने बाद ही पंखा खराब होने पर भी दुकानदार उसे ठीक कराने या बदलने में आनाकानी कर रहा है। एस.आर. मेहता ने ट्रेन में रिजर्वेशन कराया लेकिन आरक्षण के बाद भी बर्थ नहीं मिली। सीमा चोपड़ा का फोन कई महीनों से खराब पड़ा है पर विभाग फोन ठीक कराने के बजाय बिल लगातार भेज रहा है और बिलों के भुगतान के लिए बाध्य करता है। संगीता ने बाजार से मिर्च का पैकेट खरीदा, पैकेट खोला तो मिर्च में फफूंद लगी थी लेकिन दुकानदार पैकेट बदलने को तैयार नहीं।

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बाजार में उपभोक्ताओं का शोषण होना कोई नई बात नहीं है बल्कि उपभोक्ताओं के शोषण की जड़ें आज बहुत गहरी हो चुकी हैं। उपभोक्ताओं को इस शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए कई कानून भी बनाए गए लेकिन जब से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 अस्तित्व में आया है, तब से न केवल उपभोक्ताओं को शीघ्र, त्वरित व कम खर्च पर न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है बल्कि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की सेवाएं प्रदान करने वाली कम्पनियां व प्रतिष्ठान भी अपनी सेवाओं अथवा उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने के प्रति सचेत हुए हैं। भारत में उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के लिए 24 दिसम्बर 1986 को ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986’ लागू किया गया था, इसीलिए 24 दिसम्बर को ही ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस’ मनाया जाता है। देश में इसकी शुरुआत वर्ष 2000 से हुई थी और इस दिवस को मनाए जाने का मूल उद्देश्य यही है ताकि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके और अगर वे धोखाधड़ी, कालाबाजारी, घटतौली इत्यादि के शिकार होते हैं तो वे इसकी शिकायत उपभोक्ता अदालत में कर सकें। उपभोक्ता अधिकारों को और सशक्त बनाने के लिए 2020 में ‘कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019’ भी लागू हो चुका है। वैसे उपभोक्ता अदालतों की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इनमें लंबी-चौड़ी अदालती कार्रवाई में पड़े बिना ही आसानी से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यही नहीं, उपभोक्ता अदालतों से न्याय पाने के लिए न तो किसी प्रकार के अदालती शुल्क की आवश्यकता पड़ती है और मामलों का निपटारा भी शीघ्र होता है। उपभोक्ता संरक्षण कानून का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के अनुरूप उचित मूल्य, गुणवत्ता, शुद्धता, मात्रा एवं मानकों में वस्तुएं उपलब्ध हों। उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए इस समय देशभर में 500 से भी अधिक जिला उपभोक्ता फोरम हैं तथा प्रत्येक राज्य में एक राज्य उपभोक्ता आयोग है। देशभर में समस्त राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में राज्य उपभोक्ता आयोग हैं जबकि राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग नई दिल्ली में है।

अब प्रश्न यह है कि उपभोक्ता कौन है? इस बारे में उपभोक्ता संरक्षण कानून में स्पष्ट किया गया है कि हर वो व्यक्ति उपभोक्ता है, जिसने किसी वस्तु या सेवा के क्रय के बदले धन का भुगतान किया है या भुगतान करने का आश्वासन दिया है और ऐसे में किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न के खिलाफ वह अपनी आवाज उठा सकता है तथा क्षतिपूर्ति की मांग कर सकता है। खरीदी गई किसी वस्तु, उत्पाद अथवा सेवा में कमी या उसके कारण होने वाली किसी भी प्रकार की हानि के बदले उपभोक्ताओं को मिला कानूनी संरक्षण ही उपभोक्ता अधिकार है। यदि खरीदी गई किसी वस्तु या सेवा में कोई कमी है या उससे आपको कोई नुकसान हुआ है तो आप उपभोक्ता फोरम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 14 में स्पष्ट किया गया है कि यदि मामले की सुनवाई के दौरान यह साबित हो जाता है कि वस्तु अथवा सेवा किसी भी प्रकार से दोषपूर्ण है तो उपभोक्ता मंच द्वारा विक्रेता, सेवादाता या निर्माता को यह आदेश दिया जा सकता है कि वह खराब वस्तु को बदले और उसके बदले दूसरी वस्तु दे तथा क्षतिपूर्ति का भी भुगतान करे या फिर ब्याज सहित पूरी कीमत वापस करे।

- योगेश कुमार गोयल

(लेखक 32 वर्षों से साहित्य एवं पत्रकारिता में निरन्तर सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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