NCERT ने Class 9 में जोड़ा Emergency चैप्टर, पढ़ाया जाएगा लोकतंत्र का काला अध्याय

By अंकित सिंह | Jun 25, 2026

भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज़्यादा समय बाद, NCERT ने पहली बार क्लास 9 की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है। इसमें इसे प्रमुख चुनौतियों में से एक के तौर पर पेश किया गया है क्योंकि उस दौरान ज़्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। इसका ज़िक्र नई तैयार की गई सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक, 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' (Understanding Society: India and Beyond) में मिलता है, जहाँ भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले एक चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है।

इसमें आगे कहा गया है कि जून 1975 में, सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लगाया। इस दौरान, ज़्यादातर मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आज़ादी सीमित कर दी गई। किताब में आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।

किताब का एक अंश कहता है कि जयप्रकाश नारायण - एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक, जिन्हें 'लोक नायक' के नाम से जाना जाता है - के नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में, लामबंद किया। 1977 में आपातकाल हटा लिया गया और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के ज़रिए अपनी इच्छा ज़ाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।

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'आपातकाल' (Emergency) वाला हिस्सा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर हो रही व्यापक चर्चा का एक हिस्सा है। आपातकाल के अलावा, यह पाठ्यपुस्तक लोकतांत्रिक कामकाज के लिए चुनौतियों के तौर पर फ़ेक न्यूज़, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सार्वजनिक नियमों के उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है। इस अध्याय में "लोकतंत्र और आप" (Democracy and You) नाम का एक नया सेक्शन भी शामिल किया गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए जोड़ा गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें।

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