नेपाली PM का बड़बोलापन, भारत की जमीन हड़पने का दावा, अब बुरे फंस गए?

By अभिनय आकाश | Jun 03, 2026

सरहद पर खींची गई एक लकीर कभी-कभी सर्दियों तक देशों का पीछा नहीं छोड़ती। भारत और नेपाल की कहानी भी  कुछ ऐसी ही है और करीब 200 साल पहले खींची गई एक सीमा रेखा आज भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर देती है। इसी विवाद ने एक बार फिर से सुर्खियां बटोली है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में एक ऐसा दावा कर दिया जिसके बाद खुद उनकी सरकार को सफाई देनी पड़ गई। वह भी दुनिया के सामने। बालेन शाह ने यह कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया बल्कि नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय जमीन पर कब्जा किया है। अब जैसे ही इनका यह बयान सामने आया, नेपाल में राजनीतिक हंगामा मच गया। विपक्ष ने सबूत मांग लिए। पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ने तो सवाल तक उठा दिए और पूर्व राजदूतों ने भी इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। मामला बता दें कि इतना ज्यादा बढ़ गया कि कुछ ही घंटों के अंदर नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई जारी करनी पड़ गई। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने यह कहा कि प्रधानमंत्री बालेन का मतलब भारत की जमीन पर नेपाल के आधिकारिक कोई भी कब्जे से नहीं था। असल में वह 10 गजा की बात कर रहे थे। 

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खासतौर पर कैलाश मानसरोवर यात्रा की रूट को लेकर नेपाल कई बार अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। वहीं बता दें कि भारत ने भी अपना रुख इस पूरे मामले पर साफ रखा है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि बालन शाह के हालिया बयान पर भारत ने कोई भी तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं नहीं दी है। एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि भारत का यह कदम यह दिखाता है कि नई दिल्ली इस पूरे मुद्दे को कोई बड़ा कूटनीतिक विवाद बनाने के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने की अपनी पुरानी नीति पर अब भी कायम है और शायद इसकी एक वजह दोनों देशों के गहरे रिश्ते भी है। भारत ने कई बार नेपाल की मदद की है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। लाखों नेपाली नागरिक भारत काम करने के लिए आते हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। दुनिया की चुनिंदा सीमाओं में से एक ऐसी सीमा जहां दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के आ जा सकते हैं। भूकंप जैसे मुश्किल समय में भी लगातार भारत नेपाल की मदद की है। चाहे वो कोई भी क्षेत्र क्यों ना हो। लेकिन अब सुनिए आप सबसे दिलचस्प तथ्य। 

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भारत और नेपाल की सीमा लगभग 1880 कि.मी. लंबी है। और सीमा एक्सपर्ट्स के मुताबिक 97% सीमा पहले से ही तय और स्वीकार की जा चुकी है। यानी पूरा विवाद पूरी सीमा को लेकर नहीं है। जो 97% हिस्सा पहले ही सुलझा हुआ है। झगड़ा सिर्फ कुछ छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाकों को लेकर अब भी है और शायद यही वजह है कि 200 साल बाद भी यह विवाद जो है वो पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया क्योंकि आखिर में सवाल सिर्फ जमीन का नहीं होता है। सवाल इतिहास का भी होता है। नक्शे का भी होता है और राष्ट्रीय दावों का भी होता है। और इसलिए बता दें कि आज भी एक सवाल अब भी बाकी है और बार-बार पूछा जाता है कि अगर भारत और नेपाल की जो 97% सीमा विवाद सुलझ चुका है तो फिर बाकी का जो 3% रह गया है उसमें ऐसा क्या है जो आज भी भारत और नेपाल के रिश्तों में यह 3% जो है वो तनाव पैदा कर देता है।

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