By अभिनय आकाश | Oct 31, 2026
इ जराइल में 27 अक्टूबर को चुनाव हुए और उसके बाद वहां गिनती भी पूरी हो चुकी है। जैसा कि इजराइल का इतिहास यह बताता है कि आज तक किसी भी पार्टी को आज तक पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। ठीक वैसा ही इस बार भी देखने को मिला। ना तो नेतन्याहू वाले गठबंधन को बहुमत तक पहुंच सका और ना ही जो उनके मुख्य विपक्षी थे आइजनकोट उनकी पार्टी या फिर कहें कि उनका संगठन बहुमत तक पहुंच पाया है। सबसे ज्यादा सीटें अगर सिंगल हैंडेडली नेतन्याहू की लिक्विड पार्टी को ही मिली हैं।
अगर वो मुस्लिम पार्टी के साथ जाएंगे तो कहीं ना कहीं फिलिस्तीन वाले मुद्दे पर उन्हें नरमी दिखानी पड़ेगी। ऐसे में दूसरा विकल्प निकल कर सामने आ रहा है। इसकी चर्चा फिलहाल चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि यह जो 53 सीटों तक नेतन्याहू का गठबंधन पहुंचा है वह भी मेरी वजह से पहुंचा है। अगर एंड टाइम पर मैं नेतन्याहू का समर्थन नहीं करता। नेतन्याहू के समर्थन में मैं पोस्ट सोशल मीडिया पर नहीं करता तब शायद नेतन्याहू 53 सीटों तक भी नहीं पहुंचते। नेतन्याहू और आइजनककोर्ट दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं। मतलब अगर प्रथम दृष्टा कहें प्राइमरी अगर इस बात को सोचें तो नजर नहीं आता है क्योंकि आइसनकोर्ट ने नेतन्याहू की नीतियों के खिलाफ ही तो चुनाव लड़ा है। मुख्य विपक्ष में अगर कोई चेहरा है तो वो आइजनकोर्ट का ही है। आइजनकोर्ट के बारे में अगर बात करें तो आइजनकोर्ट से पूर्व सेना प्रमुख रह चुके हैं। हालांकि सेना में सर्विस नेतन्याहू भी दिए थे। लेकिन ये सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे और उसके बाद ये चुनाव लड़ रहे हैं। फिलहाल इनका जो गठबंधन है वो दूसरा सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरा है।
दोनों की विचारधारा एक ही है कि किस तरीके से फिलिस्तीन ने जो किया है उसका बदला लेना है। दोनों की नीति है कि ईरान ने अगर परमाणु हथियार बना लिया तो वो इजराइल का अस्तित्व तबाह कर देगा खत्म कर देगा। 7 अक्टूबर 2023 को जो कुछ हुआ था वहां उसमें आइज़न कोर्ट का बेटा भी मारा गया था। सबको लेकर नीति रणनीति सेम है। यहां कहा यह भी जा रहा है कि अगर दोनों गठबंधन करते हैं तो दोनों के बीच दो-दो साल का प्रधानमंत्री बनने की रणनीति बन सकती है और मतलब इस अभी तक ये रिपोर्ट्स हैं। इनका कोई पुख्ता खबर नहीं आई है।