अमेरिका में अचानक चुनाव, ट्रंप कितने वोट से पिछड़े?

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चुनाव निष्पक्ष होने पर ही वे नतीजे स्वीकार करेंगे। इस बीच चार करोड़ से अधिक लोग अर्ली वोटिंग कर चुके हैं, जिसमें डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है। नतीजों से पहले ट्रंप के बयान ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों (Mid-Term Elections) से ठीक पहले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने देश का सियासी पारा और चढ़ा दिया है। जब ट्रंप से पूछा गया कि यदि उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव हार जाती है, तो क्या वे नतीजों को स्वीकार करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न होते हैं, तभी वे परिणाम स्वीकार करेंगे। यानी मतदान प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही परिणामों की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं। अमेरिका के कई राज्यों में अर्ली वोटिंग (मतदान की तारीख से पहले वोट डालना) जारी है, जहां विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी आगे दिखाई दे रही है। ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि 3 नवंबर को होने वाले ये मध्यावधि चुनाव ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए कितने अहम हैं। अमेरिका में 3 नवंबर को मुख्य मतदान होना है, लेकिन इससे पहले ही अर्ली वोटिंग के तहत 4 करोड़ (40 मिलियन) से अधिक लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके हैं। यदि सर्वेक्षणों और शुरुआती रुझानों की मानें, तो अर्ली वोटिंग में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी पिछड़ती दिख रही है, जबकि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को 47% से अधिक समर्थन मिलता नज़र आ रहा है। वहीं, ट्रंप की पार्टी के पक्ष में करीब 36% लोगों का समर्थन दर्ज किया गया है। इससे पहले 27 अक्टूबर को भी जब ट्रंप से यही सवाल किया गया था कि पार्टी की हार की स्थिति में क्या वे जनादेश मानेंगे, तो उन्होंने दोहराया था कि वे केवल ईमानदारी से कराए गए चुनावों के परिणाम ही स्वीकार करेंगे। ट्रंप का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब मतदान प्रक्रिया ज़ोरों पर है।
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गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी चुनावों में धांधली के आरोप लगाते रहे हैं। वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद भी उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, हालांकि अदालतों में उनके दावों की पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत सामने नहीं आ सके। इस बीच, ट्रंप ने अमेरिका के 30 राज्यों की मतदाता सूचियों (वोटर लिस्ट) की भी मांग की है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि इस सूची के ज़रिए वे अपने राजनीतिक विरोधियों की पहचान कर उन पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर सकते हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव (मिड-टर्म इलेक्शन) इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। लेकिन राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में, यानी 2 साल बाद, कांग्रेस के लिए चुनाव कराए जाते हैं, जिन्हें मध्यावधि चुनाव कहा जाता है। इस बार, 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' की सभी 435 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। साथ ही, सीनेट की 100 में से 35 सीटों के लिए भी मतदान होगा। अमेरिका में कांग्रेस के दोनों सदनों पर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। ऐसे में, अगर इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिल जाता है, तो ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
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चुनाव में 'अर्ली वोटिंग' क्या होती है
अमेरिका में चुनाव की तारीख से पहले वोट डालने की सुविधा को अर्ली वोटिंग कहा जाता है। मतदाता चुनाव के दिन से पहले, एक तय कार्यक्रम के अनुसार अपना वोट डाल सकते हैं। इसके लिए वे पोलिंग बूथ पर जा सकते हैं, या कुछ इलाकों में, डाक के जरिए बैलेट पेपर भेजकर भी वोट दे सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वोट देने का मौका देना है। आपको बता दें कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) से पहले, इस बार बड़ी संख्या में मतदाता अर्ली वोटिंग के जरिए अपने वोट डाल रहे हैं।
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टेक्सास में अर्ली वोटिंग के पहले सात दिनों में 45 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने वोट डाले हैं। यह आंकड़ा 2022 के मध्यावधि चुनावों की इसी अवधि की तुलना में अधिक है। वहीं, कुछ सर्वे बता रहे हैं कि रिपब्लिकन पार्टी के मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त हासिल है। हालाँकि, शुरुआती मतदान के आंकड़ों को चुनाव का अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। लेकिन अब, सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये चुनाव ट्रम्प के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? दरअसल, ये मध्यावधि चुनाव ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के बीच में हो रहे हैं।
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