By Ankit Jaiswal | Jun 23, 2026
तकनीकी दुनिया में एआई को लेकर लगातार बहस जारी है। कई लोग इसे नौकरियों के लिए चुनौती मानते हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे नए अवसरों का द्वार बता रहे हैं। इसी बीच देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन निलेकणी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक कंपनियों की जगह नहीं लेगी, बल्कि जो संस्थान तेजी से बदलाव को अपनाएंगे उनकी क्षमता और प्रभाव को कई गुना बढ़ाएगी।
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में एआई तकनीक ने वैश्विक स्तर पर कारोबार करने के तरीके को बदलना शुरू कर दिया है। वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र सहित लगभग हर उद्योग में इसका उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में इन्फोसिस जैसी कंपनियां इस बदलाव को अवसर के रूप में देख रही हैं।
नंदन निलेकणी ने बताया कि इन्फोसिस की कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं से होने वाली वार्षिक आय अब 1 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुकी है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि दुनिया भर की कंपनियां एआई से जुड़े समाधानों में तेजी से निवेश कर रही हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार इन्फोसिस इस क्षेत्र में कई अग्रणी वैश्विक तकनीकी और कंप्यूटिंग कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कंपनियां तैयार सॉफ्टवेयर खरीदने के बजाय अपने लिए विशेष जरूरतों के अनुसार सॉफ्टवेयर विकसित करने को प्राथमिकता दे सकती हैं। उनके अनुसार भविष्य का वास्तविक मूल्य उन प्रणालियों में होगा जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल और एजेंट पारंपरिक कारोबारी प्रणालियों के साथ मिलकर काम करेंगे।
गौरतलब है कि कई बड़े कारोबारी संस्थान अभी भी एआई के पूर्ण उपयोग को लेकर शुरुआती चरण में हैं। नंदन निलेकणी का मानना है कि बड़ी कंपनियों में तकनीक अपनाने और उसके वास्तविक उपयोग के बीच अभी एक बड़ा अंतर मौजूद है। इस अंतर को कम करने में इन्फोसिस जैसी कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।
उन्होंने यह भी कहा कि बड़े संस्थानों के लिए केवल नई तकनीक पर्याप्त नहीं होती। मजबूत साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, भरोसेमंद ढांचा और व्यापक परीक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी होती हैं। यही कारण है कि अनुभवी तकनीकी कंपनियों की भूमिका भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इन्फोसिस अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से लगभग 90 प्रतिशत के साथ एआई परियोजनाओं पर काम कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं का वैश्विक बाजार 300 से 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
नंदन निलेकणी ने विश्वास जताया कि इन्फोसिस इस बदलाव का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना है कि ग्राहकों का भरोसा और वर्षों का अनुभव कंपनी की सबसे बड़ी ताकत हैं, जिनकी मदद से वह तकनीक के अगले दौर में भी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रहेगी। कुल मिलाकर उनका संदेश साफ था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता चुनौती से ज्यादा अवसर लेकर आई है और जो संस्थान समय के साथ खुद को बदलेंगे, वही भविष्य में सबसे आगे दिखाई देंगे।