By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 15, 2026
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक टीम ने मंगलवार को मध्यप्रदेश के सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पुलिस अधिकारियों को मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिले के बंडा में जहरीली शराब पीने से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोगों का बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें कुछ लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई है।
मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में पहुंची टीम ने बंडा तहसील के जगथर और घुगर गांव में शराब पीने से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। कानूनगो ने बाद में पत्रकारों से कहा कि पीड़ित परिवार के परिजनों ने उन्हें बताया कि कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
कई लोगों की मौत हुई है। ऐसे में पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है। जो कानूनी प्रावधान हैं, उनका पालन करना होगा।’’ आयोग के सदस्य ने कहा, ‘‘हमने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि परिजनों के बयान तत्काल दर्ज किए जाएं।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शराब के स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के नाम न तो दर्ज किए और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की।’’ कानूनगो ने बताया कि उन्होंने पुलिस से आग्रह किया है कि शराब बेचने वाले सभी एजेंटों के नाम सूचीबद्ध किए जाएं और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जिस शराब को पीने से लोगों की मौत हुई, वह सरकारी लाइसेंस वाली दुकानों से बेची गई थी। प्रदेश सरकार में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पिछले दिनों बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवारों और वहां इलाज करा रहे मरीजों से मुलाकात की थी।
उन्होंने 20 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। मंत्री ने यह भी घोषणा की थी कि सरकार मृतकों के परिवारों को मुआवजा देगी और तीन दिन के भीतर सभी मृतकों के बैंक खातों में राशि अंतरित कर दी जाएगी। उन्होंने कहा था कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और किसी भी परिवार को आर्थिक सहायता के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।