By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 18, 2026
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को दिए जाने वाले कर्ज (पीएसएल) में मौजूद कमियों को दूर करने और ऐसे ऋण की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि देश के विकास में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बैंकों के लिए अपने कुल ऋण का 40 प्रतिशत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को देना जरूरी है।
इसकी सफलता का आकलन केवल संख्यात्मक लक्ष्यों से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि ऋण समय पर मिला या नहीं, पर्याप्त था या नहीं और उसका उपयोग उत्पादक गतिविधियों में हुआ या नहीं।’’ उन्होंने दो दिवसीय पीएसबी कॉन्फ्लूएंस 2026 के समापन सत्र में कहा कि बैंकों को दलहन और तिलहन उगाने वाले किसानों को ऋण देने में उल्लेखनीय वृद्धि करनी चाहिए। इससे भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी की सेहत बेहतर होगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रयास को खासकर प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत शामिल जिलों के साथ से जोड़ा जाना चाहिए।
सीतारमण ने कार्यक्रम में शामिल सरकारी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्र को ऋण देने के मामले में उनका रुख ‘काफी मजबूत’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि ऋण केवल इसलिए बड़े किसानों तक सीमित नहीं होना चाहिए क्योंकि उन्हें कर्ज देना आसान होता है। बैंकों को अपनी पहुंच बढ़ानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि संस्थागत ऋण से छोटे और सीमांत किसान अपनी उत्पादकता बढ़ा सकें, फसल विविधीकरण कर सकें, बेहतर तकनीक अपना सकें और लाभकारी बाजारों से जुड़ सकें।
वित्त मंत्री ने कहा कि अंततः उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि लक्षित लाभार्थियों तक वास्तविक और उत्पादक ऋण पहुंचे। प्राथमिकता वाले क्षेत्र को ऋण देने को औपचारिक ऋण व्यवस्था को मजबूत करने, ग्राहकों का आधार बढ़ाने, मजबूत उद्यम खड़े करने और व्यापक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को प्राथमिकता वाले क्षेत्र को ऋण देने पर करीबी से नजर रखने, उभरती कमियों की समय रहते पहचान करने और उचित कारोबारी रणनीति अपनाने के लिए कहा गया, ताकि लक्षित लाभार्थियों तक वास्तविक और उत्पादक ऋण पहुंचाकर कमी को न्यूनतम किया जा सके।
उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों से अपनी संस्थागत क्षमता का लाभ उठाने, उभरते अवसरों का अनुमान लगाने और बदलती आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमताएं विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा सचिव संजय लोहिया ने कहा कि सम्मेलन से सात प्रमुख विषयों में प्राथमिकताओं की बेहतर पहचान और स्पष्ट कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों को स्पष्ट जिम्मेदारी और व्यावहारिक समयसीमा के साथ इन प्राथमिकताओं को लागू करना होगा।
सफल संस्थागत मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। पीएसबी कॉन्फ्लूएंस-2026 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों, सरकार और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने बैंकों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव और क्षमताएं साझा कीं। सम्मेलन में तैयार की गई कार्ययोजनाओं को संबंधित संस्थान आगे उचित कार्रवाई और क्रियान्वयन के जरिए लागू करेंगे।
लोहिया ने कहा कि विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सार्वजनिक वित्तीय संस्थान वित्तीय समावेश को बढ़ाने, उभरते अवसरों के लिए वित्त उपलब्ध कराने और देश की वृद्धि यात्रा के अगले चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।